नगर में 177 निजी अस्पतालों को पालिका ने भेजा नोटिस

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मुजफ्फरनगर। नगरपालिका अपनी आय बढ़ाने के साथ राजस्व से शहरी विकास को पंख लगाने की पवित्र मंशा के साथ आगे बढ़ रही है। इस दिशा में जिन क्षेत्रों में पालिका का टैक्स विभाग अभी तक टैक्स नहीं वसूल पाया है, ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित करते हुए राजस्व बढ़ोतरी के रास्ते खोले हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा राजस्व प्राप्त करने के लिए पालिका ने इसके लिए शहरी क्षेत्र के 177 निजी अस्पतालों को व्यवसायिक लाइसेंस बनवाने के लिए टैक्स विभाग ने नोटिस जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया है। इन अस्पतालों से पालिका से लाइसेंस शुल्क के रूप में 10 वर्षो का बकाया वसूलेगा।
पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप की पहल पर पालिका की आय बढ़ोतरी की दिशा में आगे बढ़ी टैक्स विभाग टीम ने शहरी क्षेत्र के इन निजी अस्पतालों को व्यवसायिक लाइसेंस बनवाने के लिए नोटिस जारी किया है। शहर में 177 निजी अस्पतालों की सूची बनाकर इनको 15 दिनों में अपना अपना व्यवसायिक लाइसेंस बनाने के लिए कहा है। हालांकि इसको लेकर कुछ निजी अस्पतालों की ओर से पिछल्ले वर्षो का बकाया मांगे जाने पर ऐतराज जताते हुए गलत बताया जा रहा है, जबकि अधिकांश अस्पतालों ने बकाया जमा कराने को समय मांगा है। टैक्स विभाग ने प्रति वर्ष लाइसेंस फीस 2000 रुपये की दर से तय की है। इन 177 निजी अस्पतालों से पालिका यदि यह 10 वर्ष की बकाया लाइसेंस शुल्क वसूलने में सफल रही तो पालिका को 35.40 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव ने बताया कि शहरी क्षेत्र में निजी अस्पतालों, आबकारी विभाग की देशी विदेशी मदिरा, बियर व भांग की दुकानों और बड़े शॉपिंग कॉम्प्लैक्स व शोरूम, होटल, रेस्टोरेंट और बैंकट हाल के व्यवसायिक वार्षिक लाइसेंस बनवाने की कार्यवाही शुरू की है। इसके लिए सीएमओ व जिला आबकारी अधिकारी से दुकानों व अस्पतालों की सूची मांगी थी। इसमें सीएमओ कार्यालय से शहरी क्षेत्र में 177 निजी अस्पतालों के संचालन की सूची प्राप्त हुई है। इन्हें नोटिस जारी करते हुए वर्ष 2014 से वार्षिक लाइसेंस बनवाने को कहते हुए दस सालों की लाइसेंस बकाया फीस जमा करने के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में निकायों में व्यवसायिक लाइसेंस बनवाने के लिए शासनादेश जारी किया था, जिसमें अस्पतालों को भी शामिल किया गया। इसके बाद आईएमए ने इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। इस पर वर्ष 2002 में कोर्ट ने स्टे जारी कर दिया। यह स्टे वर्ष 2014 तक जारी रहा था। इसके बाद आईएमए कोर्ट में हार गई और शासनादेश के पक्ष में आदेश आने पर साल 2014 से ही इसको लागू माना गया था। कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव ने बताया कि निजी अस्पतालों के बाद शहरी क्षेत्र में चल रही शराब और बियर की दुकानों तथा बड़े शोरूम आदि को व्यवसायिक वार्षिक लाइसेंस बनवाने के लिए नोटिस भेजने की तैयारी है।

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