मुजफ्फरनगर। हाईकोर्ट इलाहाबाद द्वारा उत्तर प्रदेश में आये दिन होने वाली अधिवक्ताओं की हड़ताल पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे लेकर आदेश जारी करने पर अधिवक्ताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश संघर्ष समिति के आह्नान पर कामबंद हड़ताल कर धरना दिया। बार संघों पदाधिकारियों के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने हाई कोर्ट के फैसले के प्रति रोष व्यक्त करते हुए इसे अधिवक्ताओं की आजादी के खिलाफ बताते हुए वापस लिए जाने की मांग की।
शुक्रवार को कचहरी परिसर में अधिवöाओं ने एकजुट होकर कामबंद हड़ताल करते हुए धरना प्रदर्शन किया। डिस्ट्रिक्ट बार एवं सिविल बार एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों के नेतृत्व में तमाम अधिवक्ताओं ने संयुक्त रूप से एकजुटता दिखाते हुए हाईकोर्ट के फैसले का विरोध किया और अपने चैम्बरों पर ताला लगाकर धरना दिया। जिला बार संघ के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया कि हाईकोर्ट ने पिछले दिनों एक फैसला दिया है, जिसमें बार संघों द्वारा अधिवक्ताओं के हितों की मांग को उठाने, किसी अधिवक्ता का निधन होने पर शोक प्रस्ताव के चलते होने वाले नो वर्क पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह कहा है कि यदि इस आदेश के बाद भी जिलों में बार संघ के आह्वान पर तमाम अधिवक्ताओं द्वारा हड़ताल की जाती है तो इसे कोर्ट के आदेश की अवमानना मानते हुए संबंधित बार के विरुद्ध कार्यवाही होेगी। सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष बिजेन्द्र मलिक ने बताया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ का जो अंतरिम आदेश अधिवक्ताओं के कार्य से विरत रहने के संबंध में आया है, उसके विरोध स्वरूप दोनों बार संघों के अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरö रहते हुए कामबंद हड़ताल की। उन्होंने कहा कि हम इस आवाज को उच्च न्यायालय एवं बार काउंसिल आॅफ उत्तर प्रदेश तक भी पहुंचाने का काम करेंगे। इस बीच महासचिव सुरेंद्र मलिक, सिविल बार महासचिव सत्येंद्र कुमार के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता ठा. देवेन्द्र सिंह, अनिल जिन्दल, अनिल दीक्षित, श्यामवीर सिंह, गुलवीर सिंह, नाहिद परवीन, नरेश त्यागी, निश्चल त्यागी, आदेश कुमार, अजीम मुनव्वर समेत सैंकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।






