भैय्यादूज पर भाई के ललाट पर तिलक कर इठलाई बहनें

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मुजफ्फरनगर। रविवार को दीपों के पंच पर्व महोत्सव के अंतिम दिन देश भर में भैय्यादूज पर्व पूर्ण आस्था, विश्वास एवं प्रेम के अटूट बंधनों के साथ बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान नगर मुख्यालय के साथ दूरस्थ ग्रामीण अंचलों और अन्य कस्बों तक भाई-बहन के अमिट प्रेम के प्रतीक भैय्यादूज पर्व पर गंतव्य पर जाने की जल्दी में बड़ी संख्या में लोगों को निजी वाहनों के साथ अन्य माध्यमों का प्रयोग करते देखा गया। इस बीच दूरस्थ क्षेत्रों से निजी एवं प्राइवेट वाहनों के बूते गंतव्य पर पहुंचे भाइयों को बहनों के द्वारा ललाट पर मंगल तिलक लगाकर दीघार्यु होने की मंगल कामना की। इसके साथ ही गोला, खील-पताशे एवं मिठाई समेत अन्य उपहार भेंट किए। वहीं इस दौरान भाइयों ने विभिन्न उपहारों के साथ में नकद धनराशि देते हुए जीवन प्रयन्त बहनों की सुरक्षा और रक्षा का संकल्प भी दोहराया। रविवार को इस बीच घरों में सुबह से शुरू आवागमन का दौर देर सायं तक जारी रहा। इस दौरान पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी अलर्ट मोड़ पर दिखाई दिए।
रविवार को दीपों के पंच पर्व महोत्सव का समापन पूर्ण आस्था एवं हर्षोल्लास के बीच संपन्न हो गया। इस दौरान भाई-बहन के अमिट प्रेम के प्रतीक भैय्यादूज पर्व पर नगर मुख्यालय से हाइवे समेत अन्य संपर्क मार्गो व दूरस्थ ग्रामीण अंचलों और कस्बों में दीपों के पंच पर्व के अंतिम सौपान के बीच सनातन संस्कृति के साथ देश में बहने वाली अनेकता में एकता की मिसाल को भी कायम किया। भैय्यादूज के इस पर्व पर वह क्षण हर किसी को आकर्षित किए बिना नहीं रहे, जब दशकों पूर्व गांव की गलियों से नेशनल हाइवे तक की तेज रफ्तार दौड़ती जिंदगी के बीच घरों से बाहर इस बीच हर ललाट पर बस लाल तिलक चमक उठा। वहीं भाइयों के इंतजार में पलकें बिछाए बैठी बहनों की झांकी भी किसी को क्षण भर को थम जाने का संकेत देती दिखी। इस बीच भाई-बहन के इस प्यार के अनोखे संगम के साथ बहनों का मंगल तिलक के साथ भाइयों ने भी बहनों को रक्षा के वचन संग प्रेमोपहारों की भेंट देना वास्तव में किसी बड़े अद्भुत संजोग से कम नहीं रहा। सनातन संस्कृति के अनुसार रविवार को यम द्वितीया यानि भैय्यादूज पर्व देश भर में पूरे उल्लास के साथ में मनाया गया। ऐसे में शायद कोई घर शेष बचा हो जहां भाई अपनी बहनों के लिए रक्षा वचन के साथ उपहार लेकर न पहुंचे हों। वहीं दिन भर सड़कों पर भागदौड़ के साथ मिठाइयों व अन्य दुकानों पर भारी भीड़ जुटी रही। भैय्यादूज पर्व पर छोटे बच्चों के लिए खास उत्साह से उमंग से भरा दिन रहा, ऐसे में बच्चों ने दिनभर मस्ती कर हुड़दंग किया जहां उन्हें कोई रोकटोक का भय दिखाई नहीं दिया। हालांकि कई परिवारों में बीती शाम से ही भाइयों के बहन के यहां पर पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था, जो आज सुबह दिन भर भी जारी रहा। इस दौरान घरों में खास तैयारियों के बीच दाल-छोले-चावल व नाश्ते का इंतजाम किया। भैय्यादूज के दिन वैसे तो खिचड़ी का रिवाज है, लेकिन वक्त के साथ बदलाव के बीच अब भाइयों के लिए पकवान और मिठाइयां भी घरों में बनाई जाने लगी हंै। भाई-बहन के अमिट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के बाद वर्षभर में भैय्यादूज का पर्व ऐसा पर्व है, जिसमें भाई बहनों के लिए प्रेम का प्रतीक उपहार लेकर जाते हैं। इस बीच टीके की रस्म होने तक भाई-बहनों ने निराहार रहकर, अपने व्रत धर्म को निभाए जाने की परंपरा है। दीपों के पंच पर्व के अंतिम पड़ाव के बीच में इसी परंपरा को निभाते हुए तमाम बहनों ने अपने भाइयों के ललाट पर तिलक करने के साथ में मुंह मीठा किया। इस दौरान घरों में छोटे बच्चों की किलकारी और मस्ती को लेकर परिवारों में विशेष उत्साह देखते को मिला।

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