मुजफ्फरनगर। माह-ए-रमजान इस्लाम के सबसे पाक एवं मुबारक महीनों में से एक है। कहना गलत न होगा कि दुनियाभर के मुसलमानों को रमजान का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है, जो कि शनिवार सायं चांद के दीदार के बाद स्वत: खत्म हो गया। शनिवार यानी 01 मार्च को देश में कुछ जगहों पर रमजान का चांद नजर आया है, जिसके बाद मुसलमानों में खुशी का माहौल है। दिन ढलने के साथ ही सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हुई थी, क्योंकि चांद का दीदार करने के बाद ही माह-ए- रमजान की मुबारकबाद दी जाती है और रोजे रखे जाते हैं। जनपद में जैसे ही चांद का दीदार हुआ तो मुस्लिम समाज में खुशी देखने को मिली। उधर, शहर के बाजारों के सज जाने के साथ दिनभर लोग रमजान की तैयारी में इबादत के लिए टोपियां, इत्र सहित अन्य जरुरी सामानों की खरीदारी करते दिखे।
पाक रमजान का मुकद्दस माह मुसलमानों के लिए खास होता है, जिसमें मुसलमान 29 या 30 दिनों तक हर वर्ष रोजे रखते है। ऐसे में हर बालिग और सेहतमंद शख्स के लिए रोजा रखना फर्ज भी होता है। रोजा इस्लाम के 5 सबसे जरूरी अरकान यानी स्तंभों में से एक है। नगर में रमजान का चांद दिखने के साथ सभी मस्जिदों में तरावीह की तैयारी शुरू हो गई। चांद के दीदार के साथ ही बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। रमजान माह के दौरान रोजेदारों के लिए सहरी और इफ्तार भी अहम है, जिसमें पांच वक्त की नमाज के अलावा एक खास नमाज अदा की जाती है, जिसे तरावीह की नमाज कहा जाता है। पूरे माह-ए-रमजान में तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। रमजान के चांद का दीदार होने के साथ ही तमाम मस्जिदों में तरावीह पढ़ी गई। तरावीह की नमाज ईशा की नमाज के बाद अदा की जाती है। ऐसे में शहर की अधिकांश मस्जिदों में ईशा यानी रात की नमाज 8 बजे होगी। नमाज के फौरन बाद तरावीह की नमाज शुरू होगी।
शहर इमाम तनवीर आलम ने बताया कि तरावीह की नमाज सभी के लिए सुन्नत है। तरावीह की नमाज पूरे माह-ए-रमजान में पड़नी है। रमजान में तरावीह नमाज के बीच में एक बार कुरआन पूरा करना सुन्नत है। वहीं दो बार खत्म करना अफजल हैं। तीन बार कुरआन मुकम्मल करना फजीलत माना गया है। उन्होंने अपील की कि पूरे माह इबादत करें और बुराइयों से दूर रहें। चांद के दीदार होने के साथ बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ गई। इस दौरान लोगों ने दुकानों से रोजा इफ्तार और शहरी में प्रयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं अन्य जरुरी सामान की खरीदारी की।






