कंपनी को फटकार, ईओ के हस्तक्षेप के बाद खुली हड़ताल

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मुजफ्फरनगर। सफाई व्यवस्था में सुधार की खातिर पालिका के साथ काम कर रही एमआईटूसी कंपनी के साथ कर्मियों के चल रहे प्रकरण को लेकर एक बार फिर हड़ताल हो जाने से पालिका प्रशासन की फजीहत सामने आई। शुक्रवार को आयोग सदस्य के समक्ष मुद्दा उठा तो समाधान के लिए ईओ ने कंपनी को तलब कर लिया। समझौता वार्ता के दौरान कर्मियों की शिकायत का समाधान नहीं करने पर कंपनी को फटकार के साथ कर्मचारियों को चेतावनी दी गई। इसके बाद कर्मचारियों ने बंद किए वाहनों की चाबियां कंपनी को सौंप दी। पालिका द्वारा कंपनी को समस्या समाधान करने के लिए एक सप्ताह का समय देने के साथ कंपनी मालिक को मुजफ्फरनगर आने को कहा।
शहर में पालिका प्रशासन के साथ अनुबंध के आधार पर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम कर रही एमआईटूसी प्रा. लि. नई दिल्ली के साथ कर्मियों का चल रहा विवाद फिर से हड़ताल तक पहुंच गया। वीते 27 फरवरी को नौकरी से निकाले 13 कर्मचारियों के समर्थन, वेतन, ईपीएफ और ईएसआई देयकों का भुगतान नहीं करने और अन्य समस्याओं को लेकर कंपनी के साथ काम कर रहे सुपरवाइजरों, वाहन चालकों और हेल्पर सफाई कर्मियों ने कामबंद हड़ताल कर दी। कंपनी द्वारा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए वार्डों में लगाये गये टिपर गारबेज वाहनों की चाबियां लेकर कर्मचारी भी गायब हो गये। आज कामबंद हड़ताल पर चल रहे इन कर्मचारियों ने पालिका पहुंचे यूपी एससी-एसटी आयोग के सदस्य महिपाल सिंह के समक्ष समस्याएं उठाते हुए कंपनी के खिलाफ शिकायत की। इसके पश्चात ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने अपने कार्यालय कक्ष में कंपनी के लोगों व सफाई कर्मचारियों के बीच मध्यस्थता करते हुए समझौता वार्ता बुलाई। करीब दो घंटे तक बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी।
कंपनी के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश दूबे, प्रोजेक्ट इंचार्ज कुलदीप कुमार ने सफाई कर्मियों को दूसरे कर्मियों द्वारा बरगला कर हड़ताल कराने की बात रखते हुए वाहनों की चाबियां लेकर फरार होने की बात की, जिससे वार्डों में कूड़ा कलेक्शन नहीं हो पाया। वहीं यूजर चार्ज वसूलने के बाद भी कंपनी को जमा नहीं कराने के गंभीर आरोपों के कारण कुछ कर्मियों को नौकरी से हटाए जाने की बात की। उधर, सफाई कर्मियों ने उत्पीड़न पर आवाज उठाने पर नौकरी से निकालने के साथ कंपनी के लोगों द्वारा धमकी दिए जाने की बात रखते हुए इससे जुड़े साक्ष्य दिखाए।

इन्होंने बताया-
ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि समस्या समाधान को कंपनी के मुख्य मालिक आनन्द कुमार से फोन पर वार्ता कर सारी स्थिति बताने पर पता चला कि मालिक और प्राइमरी वर्कर्स के बीच में संवाद के अभाव में समस्या हुई हैं। उन्हें मुजफ्फरनगर आकर इन कर्मियों से वार्ता करने के लिए कहा है। कर्मियों से वाहनों की चाबियां मंगाकर कंपनी के लोगों को दिलाई, इसके साथ हड़ताल खुलवा दी गई। कंपनी को निर्देश दिये कि वो एक सप्ताह में वेतन, ईपीएफ, ईएसआई सहित सभी देयकों का भुगतान एक सप्ताह में कर्मियों को करे। सुपरवाइजरों को चेतावनी दी कि यदि वसूला यूजर चार्ज का पैसा कंपनी को जमा नहीं करेंगे तो उनके विरुद्ध कंपनी कार्यवाही करेगी। मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर कंपनी से कहा है कि यदि कोई गंभीर अपराध नहीं हुआ है तो निकाले गये 13 कर्मियों को नौकरी पर वापस रखने की संभावना को तलाश किया जाये। कर्मचारियों को चेताया कि छोटी बातों पर वो हड़ताल नहीं करेंगे।

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