नहीं बनी बात, तीसरे दिन भी हड़ताल पर रहे तमाम अधिवक्ता

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मुजफ्फरनगर। बीते दिनों गाजियाबाद कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के साथ हुई मारपीट का विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में कचहरी और तहसीलों में तमाम मामले लटक गए हैं, वहीं रजिस्ट्री, बैनामे व अन्य जरुरी सभी कार्यो के बंद होने से राजस्व की हानि के साथ लोगों को तमाम कार्यो के लिए परेशान होना पड़ रहा है। बुधवार को इसी विरोध के चलते केन्द्रीय संघर्ष समिति के आह्वान पर जिले में अधिवक्ता तीसरे दिन भी कामबंद हड़ताल पर ही रहे। इस बीच कचहरी व तहसील में कामकाज न होने से लोगों को परेशान होना पड़ा।
जिला बार एवं सिविल बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष प्रमोद त्यागी व बिजेंद्र सिंह मलिक के नेतृत्व में बुधवार को तीसरे दिन भी न्यायालय परिसर मुख्य गेट पर प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और वकीलों पर हमले के आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही कराने की मांग की। इस दौरान अधिवक्ताओं के धरने को संबोधित करते हुए बार संघ अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा कि देश के इतिहास में यह ऐसी पहली घटना है, जिसमें किसी न्यायालय परिसर में न केवल पुलिस पहुंची, अपितु पुलिसकर्मियों ने कोर्ट रूम से बाहर खड़े अधिवक्ताओं के साथ में मारपीट की। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि गाजियाबाद के जिला जज पर अवमानना का केस किया जाए और इस बात की जांच हो। सिविल बार संघ के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि इस संघर्ष में समस्त अधिवक्ता साथ हैं और एकजुट हैं। उन्होंने चेताया कि जब तक गाजियाबाद प्रकरण में वकीलों को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग उठाई। इस दौरान जिला बार संघ के महासचिव सुरेंद्र मलिक, अशोक कुशवाहा, अशोक चौहान, अनिल जिंदल, जितेंद्र कुमार, जितेंद्र पाल सिंह, डॉ. मीरा सक्सेना, ओमकार तोमर, प्रवीण खोखर, सौरभ पंवार, आदेश कुमार, अश्वनी शर्मा, राकेश पाल, ललित पंवार समेत अन्य सैंकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।

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