लापता पत्रावली पर नगर पालिका में छिड़ी रार, जिम्मेदारों में हुआ वॉक युद्ध

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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका में दस्तावेज और पत्रावलियां गायब होने का क्रम तमाम प्रयासों के बाद थमने का नाम नहीं ले रहे, ऐसे में एक कर्मी के निलम्बन होने के प्रकरण से जुड़ी पत्रावली करीब 18 माह से गुम है, इस पत्रावली को जमीन खा गई या आसमान निगल गया, किसी के पास कुछ जवाब नहीं। इस पत्रावली को लेकर नए जांच अधिकारी को पत्रावली नहीं मिली ऐसे में जांच फिर अधर में लटकने की संभावना बढ़ गई है। पत्रावली को लेकर अब पूर्व व वर्तमान कार्यालय अधीक्षक आमने सामने आ गए हंै।
तत्कालीन ईओ हेमराज सिंह ने दाखिल खारिज के प्रकरण में शासन से जांच के बाद लिपिक मनोज पाल को निलम्बित कर टीएस नरेश शिवालिया को जांच सौंपी थी, तब से आज तक यह मामला विवादों में है। आरोप पत्र का जवाब देने के बाद भी मनोज पाल के खिलाफ चल रही जांच पूरी नहीं हुई, यही कारण है कि उन्हें करीब 14 माह तक निलंबित रहना पड़ा और कांवड़ यात्रा के दौरान चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने उो बहाल कर, जांच अधिकारी बदल दिया। अब उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच नए कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार को सौंपी है। ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने प्रभारी ओएस राजस्व निरीक्षक पारूल यादव को लिपिक मनोज पाल के निलम्बन आदेश से जुड़ी पत्रावली जांच अधिकारी को देने व जल्द जांच पूरी करते हुए अपनी आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। जांच के लिए उö पत्रावली मांगी तो पालिका में नई हलचल मच गई। सूत्रों के अनुसार पारूल यादव ने ईओ को जानकारी दी कि मनोज पाल से जुड़ी पत्रावली चार्ज में उन्हें नहीं मिली और वो पत्रावली पूर्व ओएस लिपिक ओमवीर के पास है। तीन दिन पूर्व पारूल यादव ने इस संबंध में ओमवीर के नाम एक पत्र जारी करते हुए इसमें कहा कि 14 अगस्त को जांच अधिकारी कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार द्वारा उन्हें आदेशित किया है कि लिपिक मनोज पाल के निलम्बन प्रक्रिया सम्बंधी पत्रावली अधिष्ठान लिपिक को उपलब्ध कराई जाये। आरोप है कि ओमवीर ने पत्र ही रिसीव करने से इंकार कर दिया और इसे लेकर पारूल यादव के साथ तीखी झड़प हुई। इस दौरान ओमवीर ने पारूल से अभद्रता भी की। जिसकी शिकायत ईओ व चेयरपर्सन को भी की गई है।
इस मामले में प्रभारी ओएस पारूल यादव ने बताया कि मनोज के निलंबन से जुड़ी पत्रावली उन्हें नहीं दी गई। ऐसे में उन्होंने पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। वहीं ओमवीर का कहना है कि जो पत्रावली उनसे मांगी जा रही है, वो कभी भी उनके पास नहीं रही। उनके ओएस रहने से पूर्व भी यह पद पारूल ही संभाल रही थी। उन्होंने अभद्रता के आरोपों को भी झूठा बताते हुए कहा कि ईओ व चेयरपर्सन को भी वो जानकारी दे चुके हैं।

इन्होंने कहा-
प्रकरण में ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि मनोज की बहाली आदेश के साथ ही कर निर्धारण अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया था। इसके साथ उनको जांच जल्द पूरी करते हुए आख्या देने के लिए कहा गया। अब प्रभारी कार्यालय अधीक्षक पारूल यादव ने निलम्बन आदेश संबंधी पत्रावली उनके पास न होकर पूर्व में उनकी सीट पर रहे लिपिक ओमवीर के पास होने की जानकारी दी है और पत्रावली उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है। ओमवीर सिंह से भी जानकारी की जा रही है।

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