मनोज पाल लिपिक के निलंबन से फाइल गायब होने तक यह है पूरा मामला

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मुजफ्फरनगर। संपत्ति के दाखिल खारिज प्रकरण में गलत ढंग से नामांतरण करने का आरोप लगाते हुए अनु शुक्ला पुत्र रवि शंकर शुक्ला निवासी गुदडी बाजार ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर 24 मार्च, 2023 को शिकायत करते हुए जांच कराने और दोषियों पर कार्यवाही करने की मांग की थी। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री कार्यालय से विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन, नगर विकास लखनऊ को जांच अग्रसारित की गई थी। विशेष सचिव के द्वारा जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर से जांच आख्या मांगी गई थी। इसमें जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त एवं राजस्व को जांच सौंपी गई थी। एडीएम की जांच आख्या के आधार पर दाखिल खारिज प्रकरण में कार्यवाही करते हुए कर विभाग के लिपिक मनोज पाल को 01 जून 2023 को निलम्बित करने के आदेश पालिका ईओ को दिय गये थे। 07 जून को ईओ हेमराज सिंह ने मनोज को सस्पेंड कर आरोप पत्र जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके साथ ही कर अधीक्षक नरेश शिवालिया को इस प्रकरण में जांच अधिकारी नामित कर दिया गया था। मनोज ने आरोपों को लेकर अपना स्पष्टीकरण भी जांच अधिकारी को सौंप दिया गया था। कर अधीक्षक ने अपनी जांच आख्या 16 दिसम्बर 2023 को ईओ हेमराज सिंह को सौंप दी थी, लेकिन इसके बाद जांच पूरी नहीं की जा सकी है। जुलाई 2024 के अंत में चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने मनोज पाल को बहाल कर दिया और अब जांच की यह गेंद कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार के पाले में है, उनका कहना है कि पत्रावली उनको मिले तो ही जांच की जाये ना। अब पत्रावली कौन उपलब्ध कराये, यह पालिका में यक्ष प्रश्न बन चुका है।


बता दें दाखिल खारिज प्रकरण की शिकायत में निलम्बित लिपिक मनोज पाल के प्रकरण से सम्बंधित पत्रावली आज ही नहीं बल्कि 15 महीनों से लापता है। पूर्व ईओ हेमराज सिंह ने इसी पत्रावली पर आरोप पत्र जारी करते हुए निलम्बन आदेश और जांच शुरू कराई थी। इसके बाद से ही पत्रावली रहस्यमयी ढंग से गायब हो गई। हर बार सवाल ओमवीर सिंह की तरफ ही उठता रहा है और वो इंकार करते रहे। दरअसल, जून 2023 में जब निलम्बन आदेश जारी हुआ तो यह पत्रावली अधिष्ठान लिपिक रहे सुनील कुमार के पास थी। उनसे सवाल जवाब हुए तो यह पता चला कि उनके द्वारा तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक पूरण सिंह को यह पत्रावली सौंपी गई थी। पूरण सिंह रिटायर्ड हुए तो पारूल यादव ही कार्यालय अधीक्षक के चार्ज पर आई और पारूल के बाद ओमवीर सिंह इस चार्ज पर रहे, लेकिन पत्रावली को तलाश नहीं कर पाया।

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