ईओ की गाड़ी को लेकर नगर पालिका सभासदों में छिड़ी रार

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मुजफ्फरनगर। नगरपालिका बोर्ड बैठक में बीते दिवस पालिका ईओ को गाड़ी दिए जाने का प्रस्ताव भले ही भारी विरोध व हंगामे के बीच पारित हो गया हो, लेकिन अभी भी कुछ सभासदों में इसे लेकर लंबी जंग लड़ने की योजना को अमलीजाम पहनाने की तैयारी कर दी है। इस प्रस्ताव को लेकर बोर्ड बैठक में भाजपा सभासद ही दो गुटों में बंटे दिखाई दिए थे, जिसमें एक पक्ष अधिकारी-कर्मियों और ठेकेदारों का पक्ष लेते रहे। वहीं इन प्रस्ताव का मुखर विरोध कर रहे सभासद राजीव का कहना है कि यह कार्य नियमों के विपरीत है, पूर्व में भी पालिका में ऐसे मामले को शासन ने अनियमतता मानते हुए कार्यवाही की थी।
शनिवार को पालिका सभागार में हुई बोर्ड बैठक के दौरान ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह को विभागीय कार्यों के लिए दी बुलेरो गाड़ी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। इसके लिए भुगतान का प्रस्ताव सदन में लाया गया, जिसका सभासद राजीव शर्मा ने मुखरता के साथ विरोध किया और इसको वित्तीय अनियमितता बताते हुए कहा कि पालिका अधिनियम में ईओ को पालिका खर्च पर गाड़ी देने का कोई नियम नहीं। उन्होंने कहा कि बैठक में जब उन्होंने ईओ प्रज्ञा सिंह से पूछा कि वह पालिका अधिनियम की कौन सी धारा व नियमावली के तहत नगर पालिका खर्चे पर गाड़ी इस्तेमाल कर रही हैं तो वे कोई उत्तर नहीं दे पाई। उन्होंने ईओ पर निजी स्वार्थ में पालिका संसाधनों का उपयोग करने के आरोप लगाते हुए कहा कि कि चेयरपर्सन को वित्तीय अनियमितता में फंसाने की साजिश सफल नहीं होने देंगे और प्रस्ताव के खिलाफ वो शासन स्तर तक आवाज को उठाएंगे। बता दें, पूर्व में कपिल देव के बोर्ड में भी उनको गाड़ी देने का मामला अनियमितता माने जाने के साथ अधिकार सीज होने का कारण बना था। साथ ही वर्ष 1998 में पालिका विभागीय कार्यों के लिए किराये पर ली जीप को तत्कालीन ईओ आरसी श्रीवास्तव ने अपने प्रयोग में लेने पर 1.47 लाख रुपए वार्षिक खर्च को अनियमितता मानते हुए कमिश्नर द्वारा रिकवरी के आदेश दिये थे।

इन्होंने कहा-
ईओ पालिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने सभासद राजीव शर्मा के आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कि उनके यहां आने से पहले ही पालिका बोर्ड ने किराये पर गाड़ी लेने का प्रस्ताव पारित कर रखा है, जो नियमानुसार है। उन्होंने निजी स्वार्थ में कोई भी दुरूपयोग नहीं किया। सभी आरोप बेबुनियाद हैं। बैठक में भी बहुमत से गाड़ी किराये पर रखने का उक्त प्रस्ताव पारित हुआ है। यदि सदन गाड़ी नहीं लेना चाहता तो पहले पूर्व वाला प्रस्ताव खारिज कराया जाये।

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