कचरे की आड़ में लौट रहा जिले में माफियाराज, लड़ाई नस्ल बचाने की है: धर्मेन्द्र मलिक

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मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। हैलो मुजफ्फरनगर….के साथ फेसबुक होकर भाकियू नेता धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि आज तक मेरी पहचान एक किसान नेता और लेखक के रूप में रही है, लेकिन आज मुजफ्फरनगर के कचरा माफियाओं ने रंगदार का नाम दिया है। इन कचरा माफिया लोगों ने डीएम-एसएसपी से मिल कर धर्मेन्द्र मलिक और भाकियू कार्यकर्ताओं पर रंगदारी मागने के गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल खड़े कर दिए। जनपद में तेजी से बढ़ते जल, वायु और अन्य प्रदूषण के कारण बीमारियां बढ़ने का क्रम वर्तमान में जारी है, जो चिंता का कारण है। इस मामले में सब कुछ आपके समक्ष है। मुजफ्फरनगर में आज के वक्त में चिंता नहीं चिंतन का विषय है, जिस पर व्यवस्था में सुधार के लिए आगे आना होगा। यूपी में योगी सरकार के राज में माफिया राज पर सवाल खड़े करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
जनपद में आरडीएफ के नाम पर छिड़ी जंग के बीच में कूड़ा-कचरा जलाने पर प्रतिबंध के बाद भी कोई कार्रवाई न छिड़ने को लेकर रार तेज हो गई है। मामले में ट्रांसपोर्टरों द्वारा लगाए गंभीर आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए भाकियू प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। पुलिस-प्रशासन को मामले में जांच करते हुए दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
भाकियू अराजनैतिक प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि जिले में पिछले एक सप्ताह से रोज लोग इस तरह की गाड़ियों को पकड़कर संबंधित विभाग को सूचना दे रहे हैं, लेकिन आज तक आरडीएफ के उपयोग को लेकर कोई दिशा निर्देश यूपी सरकार की ओर से जारी नहीं किए गए। प्रतिबंधित गाड़ियों को रोकने में प्रशासन नाकाम है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति कर्तव्य का पालन करता है तो विभागीय अधिकारी इसमें सहयोग नहीं करते। वहीं ऐसा करने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कहा कि अब जनपद में बंदूक की नोक पर कचरे का परिवहन होगा, इसका उदाहरण बीते दिवस हुई घटना से हो गया। कचरा माफिया इसके परिवहन को लेकर किसी व्यक्ति की हत्या भी कर सकते हैं। प्रदूषण मामले में अब सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ा जाएगा। यह कहना गलत न होगा कि कचरा ढोने का कार्य अब अपराधियों को दिया गया है। इसमें सभी लोगों से अपील है कि इसके खिलाफ एकत्र हो कर लड़ें, यह आपकी आने वाली नस्लों को प्रदूषण से बचाने का संघर्ष है। पेपर उद्योग पानी, वायु, जमीन, स्वास्थ्य सब खराब कर चुका है। अगर आने वाली नस्लों को बचाना है तो ऐसे लोगों के विरुद्ध संघर्ष करना होगा। यह लड़ाई किसान, मजदूर, अमीर, गरीब, व्यापारी सबकी लड़ाई है। इस संघर्ष में सबका सहयोग जरूरी है। धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि इस संघर्ष में अगर मेरी जान भी चली जाये तो इसकी परवाह नहीं करता। प्रशासन अगर अपना कार्य नहीं करता तो नागरिकों का अभियान इसके विरुद्ध जारी रहेगा।

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