मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। नगर के सरर्कुलर रोड पर विज्ञापन पोल को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार बुधवार को डीएम कार्यालय प्रांगण में डर व अनहोनी की आकांक्षा के बीच समाप्त हो गया। जाट महासभा के कड़े रुख और अपनी चौतरफा फजीहत होती देख उद्यमी सत्यप्रकाश रेशू ने ‘बैकफुट’ पर आते हुए विवादित पोल को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की स्मृति में समर्पित करने का ऐलान कर दिया। सत्य प्रकाश रैशु इससे पहले भी माननीय के खिलाफ बयान बाजी करने के चंद मिनट बाजी बैक फुट पर आ गए थे।
इस बार के विवाद की शुरुआत तब हुई जब सर्कुलर रोड स्थित ‘रेशू चौक’ का नामकरण पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर किया गया। इस कार्यक्रम के बाद उद्यमी सत्यप्रकाश रेशू और आयोजकों के बीच तल्खी बढ़ गई थी। दो दिन पहले रेशू ने आनन-फानन में मीडिया बुलाकर कई गंभीर आरोप लगाए थे उन्होंने कुछ लोगों पर दबंगई के बल पर उनके यूनिपॉल पर कब्जा करने का आरोप लगाया था कि उक्त लोग जबरन उसके यूनिपाल पर कब्जा चाहते हैं। उन्हें ‘मिट्टी में मिलाने’ की धमकी दी गई है। चौधरी चरण सिंह के नाम पर राजनीति की जा रही है। इन आरोपों के बाद जाट समाज और महासभा का गुस्सा भड़क उठा, जिसके परिणामस्वरूप मामला सीधे डीएम दरबार तक जा पहुंचा।
बुधवार को जाट महासभा के बैनर तले धर्मवीर बालियान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन शुरू कर दिया। माहौल बिगड़ता देख और समाज के बढ़ते दबाव के बीच सत्यप्रकाश रेशू को समझौता करना ही मुनासिब लगा। वह आनन फलन में व्यापारी नेता संजय मित्तल और पूर्व विधायक अशोक कंसल के साथ मौके पर पहुंचे। रेशू ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वह उक्त विज्ञापन पोल को किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह के सम्मान में समर्पित कर रहे हैं। इस घोषणा के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही खींचतान और व्यक्तिगत आरोपों के दौर पर विराम लग गया। शहर में चर्चा है कि रेशू द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों ने उन्हें ही कटघरे में खड़ा कर दिया था। समाज के विरोध और व्यापारिक संगठनों के बीच समन्वय की कमी के कारण रेशू अलग-थलग पड़ते दिख रहे थे। पूर्व प्रधानमंत्री के नाम का सहारा लेकर उन्होंने सम्मानजनक तरीके से इस विवाद से बाहर निकलने का रास्ता चुना। यहां यह बताना भी जरूरी है कि इससे पूर्व भी सत्य प्रकाश रेशु बड़े-बड़े दावे करने और मुजफ्फरनगर से पलायन की धमकी देने के बाद कुछ घंटे बाजी योगी सरकार के मंत्री की शरण में चले गए थे।






