मुजफ्फरनगर। यहां डीएस पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर स्कूल प्रधानाचार्य गगन शर्मा तथा कोऑर्डिनेटर संदीप दीक्षित सहित विद्यालय में उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय चेतना के पुंज स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। स्कूल प्रधानाचार्य श्री गगन शर्मा ने विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं राष्ट्र चेतना के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों तथा उनके शिक्षा दर्शन के विषय में विद्यार्थियों को विस्तार से बताया। स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए एवं उन्हें श्रद्धा पूर्वक नमन करते हुए स्कूल प्रधानाचार्य श्री गगन शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि स्वामी विवेकानंद का पूरा जीवन राष्ट्रीय चेतना एवं आध्यात्मिकता का सूर्य बनकर भारतीयों को प्रेरित एवं जागृत कर रहा है। उनका उद्घोष उठो जागो एवं तब तक विश्राम न करो तब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए लक्ष्य की सफलता के लिए सबसे बड़ा एवं पवित्र सूत्र वाक्य माना जाता है। स्वामी विवेकानंद भारतीय धर्म ,संस्कृति एवं आध्यात्मिकता के ध्वजवाहक तथा शिखर पुरुष के रूप में हमेशा भारतीयों के हृदय में बसे रहेंगे। वह एक विद्वान संत , ओजस्वी वक्ता, समाज सुधारक, शिक्षा तथा आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय चेतना के नायक के रूप में हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। स्कूल कोऑर्डिनेटर संदीप दीक्षित ने भी ओजस्वी वक्ता एवं युवा चेतना तथा प्रेरणा के सूर्य स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद की विद्वता एवं उनके ओजस्वी उद्घोषों के विषय में विस्तार से बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि स्वामी विवेकानंद के कथन लक्ष्य प्राप्ति के लिए परिश्रम कर रहे सभी युवाओं के लिए, व्यक्तियों के लिए के लिए, विशेष कर विद्यार्थियों के लिए दे वाक्य बनकर पूरे समाज को प्रेषित कर रहे हैं। शिकागो में उनके द्वारा विश्व धर्म सम्मेलन में दिया गया संभाषण आज भी विश्व के श्रेष्ठ संभाषणों में से गिना जाता है। उनके द्वारा कहे गए शब्द मेरे प्यारे अमेरिकी भाइयों और बहनों ने अमेरिका वीडियो पर ऐसा जादू कर दिया था कि वह हिंदू धर्म आध्यात्मिकता एवं भारतीय संस्कृति को और अधिक गंभीरता से जानने समझने के लिए सुख हो गए। उनसे प्रेरणा लेकर बहुत सारे अमेरिका वासियों ने भारतीय जीवन शैली को अपना लिया था। स्वामी विवेकानंद का शिक्षा दर्शन विश्व के श्रेष्ठ शिक्षा दर्शनों में से गिना जाता है। उनका मानना था कि वह शिक्षा बेकार है जो व्यक्ति के अंदर शेरशाह साहस पैदा नहीं करती वह सिद्धांतों के बजाय व्यावहारिकता का ज्ञान देना उत्तम मानते थे। राष्ट्र ऐसे मनीषी का का युगों युगों तक ऋणी रहेगा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग तथा उनके प्रमुख उद्घोषों को सुनाया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने श्रद्धापूर्वक स्वामी विवेकानंद को नमन करते हुए उनके आदर्शों का अनुसरण करने का संकल्प लेकर हमेशा लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर रहने तथा राज सेवा के लिए समर्पित रहने का प्राण लिया।






