हरिद्वार (रिपोर्टर)। उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया जाएगा। प्रेम नगर आश्रम में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रैस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष करण मल्होत्रा एवं जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने बताया कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देश विभाजन की पीड़ा झेलने वाले लाखों परिवारों के दर्द, संघर्ष और बलिदान को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश भी दिया जाएगा। कोर कमेटी के सदस्य सुनील अरोड़ा ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य भारत विभाजन की त्रासदी को स्मरण करना, विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करना तथा नई पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ गंगा पूजन एवं दीपदान से किया जाएगा और विभाजन के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि एवं अरदास अर्पित की जाएगी। जिला महामंत्री राम अरोड़ा व प्रदीप कालरा ने संयुक्त रूप से कहा कि पुरखों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। 14 अगस्त को अधिक से अधिक लोग पुण्य कार्य में भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका आज तक लोगों की स्मृति में हैं। अनेकों बलिदान हुए। नई पीढ़ी को अपने संस्करों और संस्कृति का ज्ञान अवश्य लेना चाहिए। समाजसेवी जगदीशलाल पाहवा ने कहा कि देश विभाजन के दौरान धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए लाखोें लोगों ने बलिदान दिया। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल पर विभाजन विभीषिका से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों और दस्तावेजों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। पत्रकारवार्ता में राज ओबराय, प्रमोद पांधी, कमल मनचंदा, नेहा मलिक, रेनू अरोड़ा, आयुषी टंडन, मिनी पुरी, शालू आहूजा, अक्षत कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे।

मानसून ऋतु-2026 के दौरान प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 8% अधिक वर्षा के बावजूद प्रदेश के 37 जिलों में औसत से कम वर्षा
लखनऊ/मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। मानसून ऋतु (01 जून – 30 सितम्बर) 2026 के दौरान उत्तरोत्तर प्रबल होती एल-नीनो परिस्थितियों के दृष्टिगत मानसून ऋतु के प्रथम चरण (जून-जुलाई) के दौरान प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा के बावजूद मानसून ऋतु के द्वितीय चरण (अगस्त-सितम्बर) के दौरान तटस्थ धनात्मक हिन्द महासागरीय द्विध्रुव एवं हिन्द महासागर में बने कुल 10






