नई दिल्ली/हरिद्वार (संतोष कुमार)। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण को विश्व आयुर्वेद रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया है। नेट ग्रीन फाउंडेशन की ओर से यूनेस्को हाउस नई दिल्ली में आयोजित अर्थ अवार्ड एंड हाई इंपैक्ट सस्टेनेबिलिटी डायलॉग 2026 के अंतर्गत आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में योगदान के लिए आचार्य बालकृष्ण को यह सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में देश विदेश के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व मौजूद रहे। आचार्य बालकृष्ण कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं थे। उन्होंने इस सम्मान को आयुर्वेद की महान परंपरा को समर्पित करते हुए कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस समृद्ध भारतीय परंपरा का है, जिसने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के सिद्धांत को जीवन में उतारा। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा तथा यूनेस्को की प्राकृतिक विज्ञान इकाई के प्रमुख डा.बेन्नो बोएर सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और नीति निर्माता उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी गणमान्य अतिथियों ने आयुर्वेद और सतत विकास के बीच गहरे संबंध पर विचार साझा किए।

हिंदू धर्म की मान्यताओं में नैतिक आचरण व ब्राह्मणों की सर्वोच्च धार्मिक और बौद्धिक स्थिति का उल्लेख है- अशोक बालियान
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोशिएसन के चेयरमैन अशोक बालियान का कहना है कि हिंदू धर्म की मान्यताओं में नैतिक आचरण व ब्राह्मणों की सर्वोच्च धार्मिक और बौद्धिक स्थिति का उल्लेख है। उन्होंने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताएं कि सन् 1660 में प्रकाशित पुस्तक ‘De reyse en Optekeningh Van den Heer Boulaye’ में फ्रांसीसी






