बढ़ी मुश्किलें: ईओ की गाड़ी भुगतान मामले में कंप्यूटर आपरेटर पर गिरी गाज

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मुजफ्फरनगर। नगरपालिका के निर्माण विभाग में क्लेरिकल मिस्टेक के बहाने मात्र 25 हजार के भुगतान को ढाई लाख रुपये के भुगतान आदेश मामले में बीते दिवस हुए हंगामे के बाद उक्त मामले में अब विभाग के कम्प्यूटर आॅपरेटर पर गाज गिरी है। चेयरपर्सन ने इस मामले में नाराजगी व्यक्त करने के साथ ईओ ने दोषी के विरुद्ध कार्रवाई के बीच ठेका कर्मी के रूप में कार्यरत कम्प्यूटर आॅपरेटर को हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भुगतान का संशोधित आदेश तैयार कराकर लेखा विभाग को भेजा है। हालांकि इसमें निर्माण विभाग के लिपिक पर कार्यवाही न होने को लेकर चर्चा जारी है।
पालिका बोर्ड की सहमति के चलते ईओ के लिए किराये पर ली गाड़ी के भुगतान पत्रावली में 25 हजार के स्थान पर ढाई लाख रुपए धनराशि अंकित किए जाने का मामला दूसरे दिन भी पालिका में चर्चा में रहा। उक्त पत्रावली को लेखा विभाग में भुगतान की स्वीकृति के साथ भेजे जाने और विभाग में कार्यरत लिपिक द्वारा पत्रावली में परीक्षण के बाद मिली अनियमितता पकड़े जाने के बाद छिड़े विवाद में शुक्रवार को पहली कार्रवाई हो गई। मामले में गंभीर त्रुटि के दोषी के रूप में कंप्यूटर आॅपरेटर को मोहरा बना दिए जाने का मामला पूरे दिन चर्चा में रहा। हालांकि निर्माण लिपिक पर कोई कार्यवाही नहीं की गई, जिसे ले कर तमाम सवाल उठ रहे हैं। बीते दिवस इस गलती के लिए निर्माण विभाग लिपिक ने मात्र क्लेरिकल मिस्टेक कहकर पल्ला झाड़ दिया। जबकि यह लिपिक पहले लेखा विभाग में ही कार्यरत रहा था। इस दौरान लिपिक पर पहले भी अनियमितता के गंभीर आरोप लग चुके हैं। लेखा विभाग के लिपिक द्वारा इस मामले की जानकारी ईओ और चेयरपर्सन को भी दी थी। इस मामले में चेयरपर्सन ने नाराजगी जताते हुए अपने स्तर से जांच कराने के साथ भुगतान आदेश टाइप करने वाले कम्प्यूटर आॅपरेटर रजत अग्रवाल की भूमिका को संदिग्ध पाये जाने पर ईओ को कार्यवाही करने के आदेश दिए।

इन्होंने कहा-
ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि निर्माण विभाग में कम्प्यूटर आॅपरेटर रजत अग्रवाल बतौर ठेका कर्मी के रूप में लंबे समय से कार्यरत हैं, जिसके द्वारा पूर्व में भी टाइपिंग एरर की शिकायत सामने आई थी। चेयरपर्सन के आदेश पर ठेकेदार को आदेशित किया है कि वो विभाग से रजत अग्रवाल को हटाकर नए कम्प्यूटर आॅपरेटर की तैनाती करें। रजत अग्रवाल की पालिका में किसी भी पटल पर सेवा पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही गाड़ी के किराये की तय राशि 25 हजार रुपये की दर से भुगतान का संशोधित आदेश विभाग को भेजा गया है।

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