मुजफ्फरनगर। पालिका में निर्माण कार्यों के वर्क आॅर्डर को लेकर रचे गए चक्रव्यूह में कुछ ठेकेदार बुरी तरह से फंसते दिखाई दे रहे हैं। 15वें वित्त एवं राज्य वित्त आयोग से पालिका से बीते 28 फरवरी को निर्माण कार्यों के वर्क आॅर्डर जारी कर दिए गए थे, जिनमें कुछ ठेकेदारों से जारी किए वर्क आॅर्डर बाद में वापस ले लिए, जबकि उक्त ठेकेदारों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों पर कार्य शुरू कर दिया गया है। ऐसे में बिना वर्क आॅर्डर के काम करने पर उनकी गर्दन फंसी है। वहीं ऐसे क्षेत्रों पर निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा सत्यापन भी किया जा चुका है। उधर, ईओ द्वारा की गई जांच पर भी सवाल उठ रहे है।
चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने नगर के विकास को पंख लगाने की दिशा में शुरू कवायदों के बीच 15वें वित्त और राज्य वित्त से निर्माण कार्य कराने के लिए बीते दिनों टेंडर निकाले थे। टेंडर खुलने पर निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 28 फरवरी को ठेकेदारों को वर्क आॅर्डर दे दिए गए। इसके बाद 7 मार्च को हुई बजट बैठक में 41 सभासदों द्वारा एई निर्माण पर गंभीर आरोप लगाते हुए टेंडरों को लेकर शिकायत की गई। यह शिकायत होने पर पालिका द्वारा कुछ ठेकेदारों से वर्क आॅर्डर फिर से वापस ले लिए गए, जबकि उक्त ठेकेदारों ने ब्रह्मपुरी, जाट कालोनी, गांधी कॉलोनी, उत्तरी कृष्णापुरी आदि कई क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। यहां पर निर्माण विभाग के अधिकारियों द्वारा सत्यापन भी किया जा चुका है। ऐसे में बिना वर्क आॅर्डर काम होने पर उक्त ठेकेदार बुरी तरह से फंस चुके है। सूत्रों का कहना है कि इन ठेकेदारों को दोबारा से वर्क आॅर्डर दिए जाने की तैयारी है, लेकिन काम पहले से चल रहा है। उधर, कुछ सभासदों ने ईओ की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। इन सभासदों का कहना है कि ईओ तकनीकी अधिकारी नहीं है। यह जांच तकनीकी अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए।







