डीएस पब्लिक स्कूल ने विज्ञान दिवस पर किया महान वैज्ञानिक सीवी रमन को नमन

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मुजफ्फरनगर। आज यहां डी एस पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर महान वैज्ञानिक सीवी रमन को नमन करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए गए। कार्यक्रम में स्कूल एजुकेशन डायरेक्टर श्रीमती संतोष जैन तथा स्कूल प्रधानाचार्य श्री गगन शर्मा सहित विद्यालय के विज्ञान के शिक्षक शिक्षिकाओं सहित अन्य सभी शिक्षक शिक्षिकाओं ने भारत रत्न तथा नोबेल पुरस्कार विजेता सर सीवी रमन के चित्र पर पुष्प अर्पित करके उनको श्रद्धा पूर्वक नमन किया। इस अवसर पर स्कूल एजुकेशन डायरेक्टर श्रीमती संतोष जैन ने भौतिकी में सर सीवी रमन के योगदान तथा उनके द्वारा किए गए शोधों तथा उनकी खोजों के विषय में विस्तार से बताया । उन्होंने कहा कि प्रकाश के विवर्तन पर सीवी रमन की खोज, रमन प्रभाव ने दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए तथा आने वाली पीढ़ी के लिए भौतिकी में प्रकाशिकी से संबंधित अनेकों उलझनों को सुलझाने की रहा प्रशस्त कर दी । उन्होंने विश्व कल्याण एवं मानव विकास में विज्ञान एवं वैज्ञानिक आविष्कारों की भूमिका तथा उनकी उपयोगिता एवं उनकी महत्ता पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए विद्यार्थियों के अंदर वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा वैज्ञानिक अभिरुचि उत्पन्न करना शिक्षा के उद्देश्यों में से एक प्रमुख उद्देश्य है। विज्ञान के बिना विकसित एवं सभ्य समाज की कल्पना करना कठिन है। कार्यक्रम में स्कूल प्रधानाचार्य श्री गगन शर्मा ने भी महान वैज्ञानिक डॉ सी सी रमन को नमन करते हुए उनके जीवन तथा उनकी प्रतिभा एवं उनकी वैज्ञानिक खोजों के विषय में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में जन्मे सीवी रमन बचपन से ही नैसर्गिक प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने अल्पायु में ही मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीए की परीक्षा में पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करके स्वर्ण पदक प्राप्त किया था, साथ ही 1907 में गणित में प्रथम श्रेणी एवं विशेष योग्यता सहित एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

सर सीवी रमन की प्रतिभा एवं बुद्धिमत्ता के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि सर सीवी रमन ने भारत सरकार के वित्त विभाग की प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करके असिस्टेंट एकाउटेंट जनरल के पद पर कलकत्ता में नियुक्ति भी प्राप्त कर ली थी,किंतु वैज्ञानिक अध्ययन में अधिक रुचि होने के कारण भारतीय परिषद (इंडियन अशोसिएशन फार कल्टीवेशन आफ साइंस ) की प्रयोगशाला से जुड़ गए। उन्होंने घर में ही प्रयोगशाला बना ली थी और समय मिलने पर वह उसी में प्रयोग करते रहते थे। उन्होंने प्रकाशिकी के अतिरिक्त ध्वनि के कंपन तथा उसके कार्यों के सिद्धांत पर भी शोध किया।सर सीवी रमन ने वस्तुओं में प्रकाश के चलने का अध्ययन किया एवं पता लगाया । भूमध्य सागर में पानी का रंग नीला दिखने के कारण पर शोध करते हुए उन्होंने अपना विश्व विख्यात रमन प्रभाव सिद्धांत दिया जिसके लिए उन्हें भौतिकी के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों को सर सीवी रमन से प्रेरणा लेकर प्रतिदिन के कार्यों में छुपे विज्ञान के रहस्यों पर विचार करने एवं तर्क करने को कहा।

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