मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा पर स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित सभा में उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हमारी सरकार देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को कायम रखने के लिए प्रदेश के जनसांख्यिकीय संतुलन को कायम रखने की चुनौती से लड़ रहा है, जो अलग राज्य से बड़ा आंदोलन है और आंदोलनकारी लोगों व शहीदों के परिवारों को इस चुनौती से निपटने में सरकार का साथ देना होगा। उन्होंने दावा किया कि इसके लिए धर्मान्तरण कानून लागू करने के साथ दंगा विरोधी कानून लेकर आए। वहीं यूसीसी लागू कर, उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है वहीं अब सशक्त भू-कानून ला रहे हैं।
बुधवार को रामपुर तिराहा गोली कांड की 30वीं बरसी पर शहीद स्मारक पर संस्कृति विभाग उत्तराखंड की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शहीद स्मारक हमें एक काले अध्याय की याद दिलाता है। दो अक्टूबर वो दिन बेहद दु:खद था। आज हम उन बलिदानियों को नमन करने यहां आये, जिनके सर्वोच्च बलिदान से उत्तराखंड राज्य मिला। आंदोलन के दौरान मैं बहुत छोटा था, लेकिन इसी वीभत्सा मुझे याद है। उस दौर में आंदोलनकारियों ने मां की ममता को छोड़ा और बहनों की राखियों को त्यागा। त्यौहारों की खुशियां भुलाकर अलग राज्य अधिकार पाने के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने निकल गये थे। 1 सितम्बर 1994 को खटीमा में पहला गोली कांड हुआ, जिसमें 7 लोग शहीद हुए। दो सितम्बर को मसूरी गोली कांड और 2 अक्टूबर के रामपुर तिराहा कांड ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी। तत्कालीन सरकार के आदेश पर निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाई और महिलाओं की अस्मत के साथ बर्बरता हुई। वो कौन भूल पायेगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में राज्य के लोगों को सबसे क्रूर व गहरा जख्म रामपुर तिराहा कांड ने दिया। जिन घरों में त्यौहार आने की खुशियां थी, वहां मातम पसरा था। लोगों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। इन शहीदों ने हमारे बेहतर भविष्य के लिए अपने वर्तमान को बलिदान कर शहादत पेश की। पूरा राज्य इन शहीदों का ऋणी है, यह कर्ज हम नहीं उतार सकते। हमने इन शहीदों के सपनों का राज्य बनाने के लिए पहले दिन से काम किया है और राज्य की जनता ने हमारे काम को सराहकर राजनीतिक परिपाटी को बदलने का काम किया। हमें दूसरा अवसर मिला। उत्तराखंड को विकसित व श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए विकल्प रहित संकल्प के साथ राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। शहीदों के आदर्श लेकर हमने उनके लिए अनेक कार्य किये हैं। राज्य आन्दोलनकारियों व उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी क्षेतिज आरक्षण दिया, महिलाओं को 30 प्रतिशत की भागीदारी दी है। पारिवारिक पेंशन का प्रावधान, इन परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा व नि:शुल्क यात्रा सुविधा सरकार ने देने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आज निखरने के साथ श्रेष्ठता की ओर बढ़ रहा है। हम पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस राज्य को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। हाल में नीति आयोग द्वारा राज्य को सतत विकास रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान दिया है। देश और विदेश के निवेशकों के लिए ये राज्य पहली पसन्द बना है। जीईपी की गणना करने वाला पहला राज्य होने का गौरव पाया है। हमारी नीति केवल राज्य का सर्वांगीण विकास करना है और जब तक शहीदों के सपनों को साकार नहीं किया जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।
इस दौरान मुख्य रूप से पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक, मंत्री कपिल देव अग्रवाल, सांसद संजय चौहान, एमएलसी वन्दना वर्मा, विधायक रूड़की प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल, चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप, पूर्व विधायक अशोक कंसल, जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष विनय रोहिला, सभासद मनोज वर्मा, बिजेन्द्र पाल, पप्पू शर्मा आदि मौजूद रहे।






