युवाओं को बचपन से ही सिखाया जाना चाहिए कि रिश्तों का टूटना जीवन का अंत नहीं है-अशोक बालियान

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मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने युवाओं को बचपन से ही रिश्तों का टूटना जीवन का अंत नहीं है, की सीख देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी सिया गोयल एक संभ्रांत और पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखती है और उसके पास कॉमर्स की डिग्री भी है। इसके बावजूद उसने अपने मंगेतर की हत्या का रास्ता चुना। एक सुशिक्षित लड़की होने के बावजूद उसके दिमाग में यह अजीब और विकृत विचार आया कि “सगाई तोड़ने से परिवार की जो बदनामी होगी, उससे बेहतर है कि केतन को रास्ते से हटाकर इसे एक हादसा साबित कर दिया जाए”।
उन्होंने कहा कि सिया पिछले काफी समय से चेतन चौधरी के साथ रिश्ते में थी। परिवार के दबाव या रजामंदी से उसकी सगाई बिजनेसमैन केतन अग्रवाल से तय हो गई।वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह चेतन के साथ रहना चाहती थी। लेकिन परिवार के सामने खुलकर ‘ना’ कहने की हिम्मत न होने के कारण उसने खौफनाक साजिश रची। सिया और उसके प्रेमी ने लोनावला के लोहागढ़ किले (Lohagad Fort) को इसलिए चुना ताकि 400 फीट गहरी खाई में धकेलने के बाद पुलिस और परिवार को यह यकीन दिलाया जा सके कि ट्रेकिंग के दौरान पैर फिसलने से मौत हुई है। सिया और उसके प्रेमी ने सोचा कि 400 फीट गहरी खाई से लाश मिलने पर पुलिस इसे सिर्फ एक ‘ट्रेकिंग एक्सीडेंट’ (हादसा) मानेगी। जब कोई व्यक्ति अकेले अपराध की सोचता है, तो उसे डर लगता है। लेकिन जब उसे अपने प्रेमी का साथ मिला, तो उसका डर आधा हो गया। दोनों ने एक-दूसरे के हौसले को बढ़ाया और यह मान लिया कि वे मिलकर पुलिस को चकमा दे देंगे। सिया की कॉमर्स की डिग्री उसे यह तो सिखा सकती थी कि बिजनेस कैसे करना है, लेकिन वह उसे इंसानियत या नैतिक मूल्य (Morals) नहीं सिखा सकी। अपने स्वार्थ और प्यार को पाने की अंधी चाहत में उसने इस बात को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया कि वह किसी मां-बाप के इकलौते या चिराग बेटे की बेरहमी से हत्या करने जा रही है। हम अपनी शिक्षा प्रणाली में केवल डिग्रियों को महत्व दे रहे हैं, संस्कारों और नैतिक मूल्यों को नहीं। एक पढ़े-लिखे इंसान में जब ‘सहानुभूति’ (Empathy) खत्म हो जाती है, तो वह दूसरे इंसान को सिर्फ अपनी राह का रोड़ा समझने लगता है। सिया के दिमाग पर अपने प्रेमी के साथ रहने का जुनून इस कदर हावी था कि उसने केतन को एक इंसान या किसी के बेटे के रूप में देखना बंद कर दिया था। मर्डर वाले दिन भी, उसने केतन के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, डांस किया और फिर उसे खाई में धकेल दिया।
पुलिस ने जब सिया और चेतन के मोबाइल फोन का कॉल डेटा रिकॉर्ड निकाला, तो पता चला कि 1 जनवरी से 18 जून (हत्या के दिन) के बीच दोनों के बीच 2,004 बार फोन पर बातचीत हुई थी। इन 6 महीनों में दोनों ने कुल मिलाकर 238 घंटे फोन पर बात की थी। पुलिस के अनुसार, कई कॉल्स तो लगातार 2 से 3 घंटे से भी ज्यादा लंबी थीं, जिससे साफ होता है कि हत्या की साजिश बेहद सोची-समझी और लंबी प्लानिंग के तहत रची जा रही थी।पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 18 जून को केतन की मौत हो जाने के बाद भी सिया और चेतन के बीच कॉल्स और मैसेज का सिलसिला जारी रहा ।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि केतन ने सिया के साथ इंडोनेशिया (बाली) में एक प्री-वेडिंग फोटोशूट प्लान किया था। प्रेमी चेतन के विरोध के कारण सिया ने चालाकी से रास्ते में ही खालापुर के पास केतन का पासपोर्ट फाड़कर फेंक दिया और ट्रिप कैंसिल करवा दी। इसके डिजिटल चैट्स और लोकेशन भी पुलिस के हाथ लगे हैं।
जब कोई पढ़ा-लिखा व्यक्ति हत्या जैसा कदम उठाता है, तो उसके पीछे वैचारिक समझ की कमी नहीं, बल्कि तीव्र मानसिक और सामाजिक दबाव काम कर रहे होते हैं। इस दौरान मस्तिष्क का ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ (जो तार्किक निर्णय लेता है) काम करना बंद कर देता है।शिक्षित अपराधी अपराध से बचने या लाश को ठिकाने लगाने के तरीके इंटरनेट पर सर्च करते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि वे जेल जाने से बच जाएंगे।अदालती मामलों में सालों साल लगने के कारण अपराधियों के मन में कानून का तत्काल डर खत्म हो जाता है।
सिया की सोच में ‘समस्या का सामना करने’ (Problem Solving) की क्षमता शून्य थी। उसने पारिवारिक दबाव और अपनी इच्छाओं के बीच के द्वंद्व को सुलझाने के लिए सीधे ‘अपराध’ का रास्ता चुन लिया। युवाओं को बचपन से ही ‘अस्वीकार्यता’ (Rejection) और ‘विफलता” (Failure) को संभालना सिखाया जाना चाहिए। रिश्तों का टूटना जीवन का अंत नहीं है। युवाओं को यह भी जागरूक किया जाना चाहिए कि इंटरनेट पर अपराध सर्च करना या डिजिटल साजिशें रचना उन्हें कभी बचने नहीं देगा। पुलिस की सायबर विंग हर कदम को ट्रैक कर सकती है। यदि आप किसी के साथ रिश्ते में हैं या सगाई हो चुकी है, तो साथी के इन व्यवहारों पर ध्यान दें । जैसा कि केतन के मामले में हुआ (पासपोर्ट फटना/ट्रिप कैंसिल होना), यदि पार्टनर बार-बार मिलने से कतराए या अजीब बहाने बनाए, तो सचेत हो जाएं।
ऐसे मामलों में न्याय मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए। जब अपराधियों को दिखेगा कि पढ़े-लिखे होने के बावजूद कानून उन्हें तुरंत और कड़ी सजा (फांसी या उम्रकैद) दे रहा है, तो उनके मन में डर पैदा होगा। भारत में संगीन अपराधों (जघन्य हत्याओं) के लिए ‘टाइम-बाउंड ट्रायल’ कानून होना चाहिए।अदालतों पर मुकदमों का भारी बोझ है, जिसे कम करने के लिए जजों की संख्या बढ़ानी होगी ताकि डे-टू-डे (रोजाना) सुनवाई हो सके।
जब भी किसी गंभीर मामले में कोर्ट त्वरित सजा (जैसे उम्रकैद या फांसी) सुनाए, तो उसे मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जाना चाहिए। युवाओं के मन में यह बात पूरी तरह साफ होनी चाहिए कि “कुछ समय के लिए बचना संभव हो सकता है, लेकिन पुलिस के शिकंजे और कानून की सजा से बचना नामुमकिन है।”
पुलिस कप्तानों (IPS) और साइबर सेल प्रमुखों द्वारा कॉलेजों में सीधे संवाद सत्र चलाना चाहिए। पुलिस कप्तानों (IPS) और साइबर सेल प्रमुखों द्वारा युवाओं के मन से यह बात पूरी तरह साफ कर देनी चाहिए कि “कुछ समय के लिए बचना संभव हो सकता है, लेकिन पुलिस के शिकंजे और कानून की सजा से बचना नामुमकिन है।” युवाओं को यह समझाना चाहिए कि रिश्ता टूटना एक सामान्य बात है, जीवन का अंत नहीं।

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