मुजफ्फरनगर। किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर बुधवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित मासिक किसान दिवस के दौरान मौजूद किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि यह आयोजन मात्र कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां उठाई जाने वाली तमाम शिकायतों और समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता, पूरे माह में एक भी शिकायत का किसी अधिकारी द्वारा समाधान नहीं होता है, ऐसे में इस किसान दिवस की जरुरत समझ से परे की बात है। किसान संगठनों ने इसके साथ चकबंदी, बिजली, पानी, अतिक्रमण, सड़क निर्माण और गन्ना भुगतान नहीं होने की शिकायतों को उठाते हुए समय से समाधान की मांग की।

कलेक्ट्रेट स्थित चौधरी चरण सिंह सभागार में मासिक किसान दिवस का आयोजन किया गया। बुधवार को आयोजित किसान दिवस में अधिकारियों के सामने किसान संगठनों के नेताओं ने विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता के साथ उठाया। बैठक में जहां गांव दतियाना में नलकूप पर हुई चोरियों के मामले में खुलासा नहीं होने पर रोष जताया, वहीं ग्राम बागोवाली में बस्ती के बीच में खाली पड़ी 3 बीघा भूमि पर बड़ी संख्या में कूड़ा करकट पड़ा होने और यहां पर ग्रामीणों द्वारा कूड़े में आग लगा देने पर इससे धुआं होने से भारी परेशानी की समस्या से अवगत कराया। इसी गांव में विद्युत लाइन 3 साल पहले डाली गई थी, लेकिन एक छोटा सा टुकड़ा छोड़ दिये जाने से काफी संख्या में लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं पुरबालियान गांव की चकबंदी प्रक्रिया के बीते 36 वर्षों से लंबित होने की समस्या को उठाते हुए किसानों ने बैठक में अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर चकबंदी प्रक्रिया को जल्द पूर्ण नहीं किया गया, तो 1 जून से वे जिलाधिकारी आवास पर चूल्हे लेकर डेरा डालने को विवश होंगे। इसके अलावा ग्राम भूराहेड़ी भूमिया खेड़ा धार्मिक स्थल पर गंदगी का मुद्दा भी उठा। भाकियू के जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने बताया कि अधिकारियों ने इस क्षेत्र में सफाई का दावा किया, लेकिन स्थिति जस की तस है। उन्होंने इस बीच झूठी रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों के निलंबन की मांग की। शेरपुर गांव के मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या के साथ बकाया गन्ना भुगतान का मुद्दा भी आया, लेकिन तब तक जिला गन्ना अधिकारी बैठक से जा चुके थे। भाकियू टिकैत के महानगर अध्यक्ष गुलबहार राव ने अपने गांव की मुख्य सड़क का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 20-25 सालों में वह सड़क बनी थी लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते सड़क के दोनों ओर नाली नहीं बनाए जाने की वजह से सारा पानी सड़क पर आने व सड़क टूटने की कगार पर पहुंच जाने की बात की। उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि सड़क के दोनों ओर नाले बनवाए जाएं जिससे पानी सड़क पर ना आए। यदि प्रशासन द्वारा समस्या का निस्तारण नहीं होगा तो 10-15 दिन बाद रुड़की चुंगी को जाम करते हुए बड़ा आंदोलन किया जाएगा। एडीएम प्रशासन संजय कुमार सिंह ने इन सभी लिखित शिकायतों के समाधान का मौजूद किसानों को आश्वासन दिया।






