मुजफ्फरनगर। जब जागे, तब ही सवेरा… पढ़ाई को लेकर की गई मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। ये मिसाल डॉ. लक्ष्मण सिंह ने चरितार्थ करते हुए जनपद का गौरव बढ़ाया है। स्नातक में सिर्फ 39 प्रतिशत अंक पाने के बाद पढ़ाई का ऐसा जूनून सवार हुआ कि 11 विषयों में यूजीसी नेट पास कर वे देश की सुर्खियों में आ गए हैं। शुरूआती दौर में नौवीं में दो बार फेल हुए डॉ. लक्ष्मण ने ऐसा इतिहास रचा कि न सिर्फ पीएचडी की, अपितु 11 विषयों में यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर इंडिया बुक आॅफ रिकार्ड में नाम दर्ज करा दिया।
नगर के खादरवाला निवासी डॉ. लक्ष्मण सिंह ने अपने जज्बे, लगन एवं परिश्रम से नया इतिहास लिखा है। सेवानिवृत्त अधिकारी बोहरन लाल के छोटे पुत्र लक्ष्मण जब कक्षा नौवीं में दो बार फेल हुए तो परिवार सदस्यों के अरमानों पर पानी फिर गया। परिवार ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में प्राइवेट फार्म भरवाकर उनका हौसला बढ़ाया। बारहवीं पास कर एंट्रेंस एग्जाम क्वालीफाई करने के बाद डॉ. लक्ष्मण ने दिल्ली के जेएनयू में चीनी और स्पेनिश भाषा आनर्स कोर्स में दाखिला लिया। यहां भी उन्हें निराशा ही मिली। विपरित परिस्थिति होने के बाद भी लक्ष्मण ने इस बीच हार नहीं मानी और फिर डीय से स्रातक करने की ठान ली। पहले साल में दो विषय में फेल होने के बाद तीसरे वर्ष में जेएनयू से मास्टर इन इंटर नेशनल रिलेशन की प्रवेश परीक्षा पास करने में कामयाब रहे। बड़ी मुश्किल से बीए की डिग्री मात्र 39 प्रतिशत मार्क्स से पास करने के बाद जेएनयू में ही आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स का एंट्रेंस टॉप कर मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके बाद लक्ष्मण सिंह में पढ़ाई को लेकर ऐसा जनून पैदा हुआ कि दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया से दलित राजनीति विषय पर वर्ष में एमफिल तथा नेपाल की दलित कला पर पीएचडी कर सभी को चौंका दिया। उन्होंने यूजीसी नेट परीक्षा में नया इतिहास रच दिया। लोक निर्माण विभाग जयपुर में बतौर अनुवादक अधिकारी रहे लक्ष्मण सिंह को मलाल है कि देश के साथ ही जिले का गौरव होने के बावजूद सरकार ने आज तक भी उनकी योग्यता को नहीं जाना। तमाम डिग्री व अन्य योग्यताओं के बाद डॉ. लक्ष्मण सिंह का लक्ष्य 25 विषयों में यूजीसी नेट करने की इच्छा व्यक्त की है, जो एक गौरवशाली क्षणों से कम नहीं होगा। मीडिया से वार्ता के दौरान डॉ. लक्ष्मण सिंह की ईरानी दोस्त सारा, पिता बोहरन लाल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता होती लाल शर्मा मौजूद रहे।







