कंपनी हड़ताल में कर्मियों ने तोड़ी गाड़ियां, 13 पर गिरी गाज

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मुजफ्फरनगर। शहरी सफाई व्यवस्था के लिए अनुबंध के आधार पर नगर पालिका के साथ कार्यरत कंपनी में कर्मियों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल कर दी। इसके विरुद्ध एक हफ्ते से जारी हड़ताल में बात इतनी बिगड़ी कि कर्मियों ने प्रदर्शन के बीच कंपनी के कूड़ा वाहनों का चक्का जाम कर दिया और दूसरे लोगों से वाहन चलवाने का प्रयास करने पर कर्मचारियों ने कुछ वाहनों में तोड़फोड़ कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। कंपनी ने हड़ताल खुलवाने के बाद अब तोड़फोड़ और हड़ताल करवाने के आरोप में 13 कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिससे कर्मियों में फिर रोष व्याप्त है।
नगरपालिका ने शहरी क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन और डलावघरों से कूड़ा निस्तारण के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को अनुबंध के आधार पर कार्य करने के लिए दिल्ली की एमआईटूसी कंपनी को शहर के 55 वार्डों में 14 माह के लिए कार्य करने को चुना गया। कंपनी को इसके लिए प्रति माह 92 लाख रुपये भुगतान पालिका कर रही है, जबकि उक्त कंपनी हर महीने 27 लाख रुपये यूजर चार्ज के रूप में पालिका कोष में जमा करने की शर्त तय हुई थी। पहले ही दिन से कंपनी विवादों में बनी हुई है और उस पर अनियमितता के गंभीर आरोप लगते रहे है। कंपनी के खिलाफ उत्पीड़न के आरोपों के बीच बीते दिनों कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। जहां वाहनों के चक्का जाम के बीच वार्डों में वाहन भेजने को कंपनी द्वारा दूसरे कर्मियों को लगाने के दौरान कई गाड़ियों में तोड़फोड़ करते हुए गाड़ियों के शीशे तोड़ दिये गये।

इन्होंने कहा
एमआईटूसी के परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार ने बताया कि पीएफ आदि मांगों को लेकर कुछ कर्मियों ने हड़ताल की थी। इसमें कुछ कर्मचारियों ने साजिश के तहत हड़ताल कराने के साथ गाड़ियों में तोड़फोड़ कराने का काम किया। ऐसे कर्मचारियों को कंपनी ने चिन्हित किया है। उनको नौकरी से हटाने के लिए पत्र जारी कर दिया। ऐसे 13 कर्मियों संदीप कुमार, अंश वशिष्ठ, संजय कुमार, आजाद बाबू, अंकित, संदीप गोपाल, आशीष, विनीत कुमार, अमित कुमार, गौरव, ओमवीर सिंह, सुशील और प्रिंस सहित 10 वाहन चालक और तीन सुपरवाइजर शामिल हैं।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि कंपनी में वार्डों में कार्यरत कर्मचारियों ने बीते दिनों से हड़ताल कर रखी थी। पालिका ने मामले को वॉच किया। हड़ताल कल खुल गई है। कर्मियों को हटाने का मामला कंपनी का निजी निर्णय है, इसमें पालिका हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन जितने दिन हड़ताल रही, उतने दिन का पैसा कंपनी के मासिक भुगतान राशि से काटा जायेगा।

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