मुजफ्फरनगर। पालिका प्रशासन की ओर से नगर क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कार्य में लगी दिल्ली की कंपनी एमआईटूसी द्वारा वार्डों में कार्यरत सुपरवाइजरों का वेतन रोके जाने के बाद शुरू विवाद का पटाक्षेप हो गया। मंगलवार में सुबह कामबंद हड़ताल समाप्त करते हुए कर्मचारी कंपनी में काम पर लौट आए और वार्डों में कूड़ा कलेक्शन दो दिन बाद शुरू कर दिया। इसके साथ ही कर्मचारियों की मांगों का निस्तारण करने के लिए कंपनी में सहमति बनी, वहीं सुपरवाइजरों ने फरवरी में कंपनी का बकाया हिसाब किताब करने का भरोसा दिया है।
नगरपालिका परिषद् की ओर से किए अनुबंध के आधार पर शहरी क्षेत्र में कूड़ा कलेक्शन कर रही कंपनी एमआईटूसी ने यूजर चार्ज के रूप में घरों से की जाने वाली वसूली का पैसा जमा न होने पर सभी सुपरवाइजरों का दिसम्बर माह का वेतन रोक दिया था। इससे नाराज कर्मचारियों ने रविवार सुबह कंपनी दफ्तर पर विरोध प्रदर्शन करते हुए वाहनों का चक्का जाम करते हुए कामबंद हड़ताल कर दी थी। इससे शहर में कूड़ा कलेक्शन का काम बंद हो गया। कंपनी और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बनने के कारण दो दिन हड़ताल जारी रही। इसी बीच कंपनी के एमडी कमलजीत को भी दिल्ली से यहां पर वार्ता के लिए आना पड़ा था।
कंपनी प्रोजेक्ट हैड कुलदीप सिंह ने बताया कि मंगलवार को कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हो गई और आज सवेरे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए सभी टीमों को गाड़ियों के साथ निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से सहमति बनने पर सुपरवाइजरों का वेतन जारी कर दिया गया। इसके साथ ही कर्मियों ने अपने पीएफ का भुगतान भी मांगा है, इस पर 30 जनवरी तक सभी कर्मचारियों का पीएफ भुगतान का मामला सुलझा लिया जायेगा। इसके लिए उनको कंपनी ने दिल्ली बुलाया है। वहीं इन सुपरवाइजरों को कंपनी के बकाया यूजर चार्ज का हिसाब देने के लिए अंतिम अवसर दिया है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी के बाद सुपरवाइजरों ने बकाया जमा कराते हुए हिसाब करने का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में लगी टीमों को वार्डों में डबल शिफ्ट में काम करने के लिए निर्देशित किया है, ताकि 2 दिन की हड़ताल के कारण बनी विपरीत परिस्थितियों को सामान्य किया जा सके।







