मुजफ्फरनगर/मेरठ (रिपोर्टर)। डिजिटल मीडिया के इस दौर में नैरेटिव सेट करना चलन बना हुआ है। आज युद्ध में भी नैरेटिव के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। कई मामलों में तो गलत नैरेटिव युद्ध से भी खतरनाक हो जाता है। यह बात विश्व संवाद केन्द्र, मेरठ द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित नारद सम्मान समारोह में डीडी न्यूज के वरिष्ठ सलाहकार सम्पादक अशोक श्रीवास्तव ने कही। उन्होंने कहा आज मीडिया का एक हिस्सा नैरेटिव का भागीदार बन गया है। अभी हाल ही में वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इन्डेक्स रिपोर्ट में भारत को 157वें नम्बर पर रखा गया है और पाकिस्तान जैसे देश को 153 वें स्थान पर रखा गया है। इस रिपोर्ट को देखने से लगता है कि भारत में प्रेस की स्थिति पाकिस्तान से भी खराब है। ऐसी स्थिति में हमारा अर्थात पत्रकार का मूल कार्य शुरू होता है, तथ्यों की जड़ तक जाना, शोध करना और उसके पीछे के कारणों को उजागर करना। इस इन्डेक्स रिपोर्ट पर मेरे द्वारा शोध किया गया तो मैने पाया कि जार्ज सोरेस द्वारा संचालित यह कम्पनी सर्वे करा रही है और इस वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इन्डेक्स रिपोर्ट में भारत विरोधी पत्रकारों की रिपोर्ट प्रकाशित होती है। जार्ज सोरेस नामक व्यक्ति जिसने कुछ दिन पूर्व कहा था कि वह भारत की चुनी हुयी वर्तमान सरकार को गिराने के लिए कई सौ करोड़ रूपये खर्च कर सकता है। इस बात से स्पष्ट होता है कि यह लोग भारत विरोधी हैं और देश के विरूद्ध एक ऐजेंडै के तहत नैरेटिव सेट करने में लगे हैं। उन्होंने ऐसे ही कई इन्डेक्स द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को तथ्यों के साथ स्पष्ट किया। उन्होंने कहा आज भारत दुनिया में अपनी पहचान को कई सन्दर्भों में स्थापित कर रहा है। इसके चलते ऐसे तथाकथित रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले अथवा तथाकथित पत्रकार भारत के विरूद्ध नैरेटिव सेट करने में सक्रिय हो गए हैं। उन्होने बताया कि हमें अपने गौरवशाली इतिहास से षडयन्त्र पूर्वक दूर रखा गया। हजारों लोगों नें बलिदान दिया तब जाकर कहीं स्वतन्त्रता मिली और हमें पढ़ाया गया कि दे दी हमें आजादी, बिना खड़ग बना ढाल। उन्होंने बताया कि आजादी का आन्दोलन मेरठ से शुरू हुआ एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक ही गांव में 52 लोगों को अंग्रेजों द्वारा इमली के पेड़ पर फांसी पर लटका दिया गया। इतना ही नहीं उनके मृत शरीरों को 37 दिन तक उसी इमली के पेड़ पर टांगे रखा। हमारे इतिहास में ऐसी अनेक घटनाएं छिपा दीं गयीं। पत्रकारिता का मूल कार्य है ऐसी घटनाओं को उजागर करे और तथ्यों को जनता के सामने प्रस्तुत करे। हमारा धर्म है राष्ट्र प्रथम।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचार प्रमुख सुरेन्द्र सिंह ने देवर्षि नारद जी के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि आज जिस वाल्मीकी रामायण का हम लोग अध्ययन एवं वाचन करते हैं उसकी प्रेरणा देवर्षि नारद ही थे। उन्होंने बताया कि देवर्षि नारद इस ब्रहमांड के प्रथम संवाददाता थे। उनका संवाद कौशल सर्वविदित है वह भगवान राम के दरबार में भी उतने ही प्रासिंगक थे और रावण के दरबार में भी। वह कंस के राज्य में भी उतना ही आदर पाते थे तो भगवान कृष्ण के लिए वह उतने ही पूज्य थे। इसका तात्पर्य यह है कि वह सत्य बोलते थे और उस संबंधित व्यक्ति के हित का बोलते थे इसलिए वह सर्वप्रिय और सर्वग्राही थे। वह अनेकों कलाओं से सम्पन्न थे। वास्तव में तथ्यों, मूल्यपरकता, त्वरिता एवं प्रस्तुतीकरण की कला यदि आज के पत्रकार को सीखनी है तो उसे देविर्षि नारद के जीवन चरित्र का अध्ययन करना चाहिए।

मुख्य अतिथि के रूप में मेरठ के महापौर हरिकान्त अहलूवालिया ने कहा कि आज पत्रकारिता में विश्वसनीयता का संकट है और यह संकट कोई एक दिन में आया है, ऐसा नहीं है। हम देखते हैं कुछ मीडिया घराने या पत्रकार घटनाओं की रिपोर्टिंग तथ्यों को दरकिनार करके करते हैं जिसकी हमें तुरन्त सच्चाई नहीं पता चलती। उन्होंने गुजरात में हुए गोधरा दंगों का उदाहरण देते हुए बताया कि तत्कालीन कुछ मीडिया रिपोर्ट ने सच प्रस्तुत नहीं किया। आज वह सच सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सभी को समाज एवं देश का हित सर्वोपरि रखते हुए कार्य करना चाहिए।
कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार सूर्यकान्त द्विवेदी ने कहा कि आज की पत्रकारिता को नारदीय संवाद परम्परा का वाहक बनना पड़ेगा। उन्होंने नवेदित पत्रकारों का आहवान करते हुए कहा कि हमें अपने अध्ययन के स्तर को बढ़ाने के साथ-साथ तत्यपरकता पर भी ध्यान केन्द्रित करना पड़ेगा अन्यथा पत्रकारिता का भविष्य अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम भी इस लोक का ही हिस्सा हैं और लोकतन्त्र मजबूत करने के लिए हमें सजग रहने के साथ-साथ अपने तंत्र को विश्वसनीय और मजबूत बनाना होगा। उन्होंने पुस्कृत सभी पत्रकारों एवं शिक्षाविदों को बधाई दी।
नारद सम्मान समारोह में नारद सम्मान की घोषणा विश्व संवाद केन्द्र मन्त्री प्रो० प्रशान्त कुमार ने की। उन्होंने बताया कि इस नारद सम्मान के लिए सभी श्रेणियों में कुल 62 आवेदन प्राप्त हुए। घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि सभी पांच कैटैगेरी में उनके द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गये उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित किया जा रहा है।
प्रिंट मीडिया: अमन कुमार शर्मा अमर उजाला बिजनौर, इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटलः शालू अग्रवाल, दैनिक भास्कर, डिजिटल, मेरठ, फोटो जर्नलिस्ट कैटेगरी में भूषण भास्कर, दैनिक जागरण, मुज्जफरनगर, सोशल मीडियाः खुशी वर्मा एवं शिवम तुरैहा, विदुर दृष्टि, मीडिया शिक्षाविदः प्रो० श्रृद्धा पुरोहित, नोयडा इन्टरनेशनल विश्वविद्यालय, नोयडा। इन सभी का चयन करने के लिए चयन समिति में डॉ० मनोज श्रीवास्तव, शरद व्यास एवं पंकज राज शर्मा रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ० कपिल अग्रवाल द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो० प्रशान्त कुमार ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुधाकर आशावादी, जगत सिंह दौसा, राजन कुमार, डॉ० सदीप त्यागी, डॉ० यशवेन्द्र वर्मा, डॉ० अशोक कुमार, प्रो० संजीव शर्मा, डॉ० नीरज सिंघल, डॉ० प्रदीप कुमार, पूर्वी महानगर प्रचार प्रमुख संजीव गर्ग, पश्चिमी महानगर प्रचार प्रमुख सुनील कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
बता दे, भूषण भास्कर फोटो जर्नलिस्ट के साथ ही अपनी बेहतरीन मधुर व्यवहार एवं प्रस्तुति के बूते फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से देश भर में विशेष पहचान रखते हैं। प्रमुख राजनीतिज्ञ एवं फिल्म अभिनेता राज बब्बर के साथ उनके संबंधों को पुरानी पीढ़ी के लोग बखूबी जानते हैं। फ्रेंड्स रिपोर्टर परिवार भूषण भास्कर को मिले सम्मान के लिए आयोजनों के साथ फोटो जर्नलिस्ट भूषण भास्कर के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करता है।

खालापार में आग के गोले में तब्दील हुआ ट्रांसफार्मर, मचा हड़कंप
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। दिल्ली एनसीआर के साथ समूचे उत्तर भारत में मौसम के बदले मिजाज के बीच गर्मी और ओवरलोड के कारण लोगों का बुरा हाल है। ऐसे हालातो के बीच रविवार को शहर के खालापार क्षेत्र में एक बडे ट्रांसफार्मर में भयंकर आग लग गई। यह ट्रांसफार्मर घनी आबादी के बीच रखा हुआ था। जिस






