मिथलेश ने सुम्बुल राणा को 30,496 मतों से हराया

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मुजफ्फरनगर। मीरापुर विधानसभा सीट पर भाजपा-रालोद गठबंधन में एनडीए प्रत्याशी पूर्व विधायक मिथलेश पाल ने आखिरकार धमाकेदार जीत हासिल कर ली है। मतगणना पूरी होने के बाद आये परिणाम ने सभी के आंकड़ों को फेल कर दिया। यहां पर वैसे तो रालोद की ही जीत सुनिश्चित मानी जा रही थी, लेकिन यह एकतरफा होगी यह किसी का दावा नहीं था। इस उपचुनाव में किस्मत की धनी निकली मिथलेश पाल ने सपा प्रत्याशी सुम्बुल राणा को 30426 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया है। यहां बसपा प्रत्याशी पांच हजार वोट भी नहीं ले पाये और उनकी जमानत जब्त हो गई। जबकि रालोद व सपा के बाद तीसरे नम्बर पर रहे आसपा प्रत्याशी का प्रदर्शन शानदार रहा। 22400 वोट प्राप्त कर किए तो एआईएमआईएम की पतंग के नाम पर भी मुस्लिमों ने साइकिल का मोह छोड़कर जमकर मतदान किया। औवेसी की पार्टी को 18867 वोट मिले और मुस्लिमों के बीच हुए चन्द्रशेखर व औवेसी फैक्टर के प्रभाव ने ही यहां पर रालोद नीत एनडीए गठबंधन की जीत को आसान कर दिया।
रालोद के टिकट पर सांसद बने चंदन चौहान के द्वारा इस्तीफा दिये जाने के बाद मीरापुर सीट पर उप चुनाव सम्पन्न हो गया। यहां पर रालोद प्रत्याशी की जीत होने से भाजपा और रालोद खेमे में खुशी का आलम छाया हुआ है। रालोद प्रत्याशी पूर्व विधायक मिथलेश पाल के रूप में एनडीए को मीरापुर सीट पर मिली इस शानदार जीत का मुख्य कारण मुस्लिम मतों का बंटवारा ही माना जा रहा है। आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी जाहिद हुसैन के पक्ष में दलित मुस्लिम समीकरण का जादू चला तो उनके समाज के वोटरों ने पूरी एकजुटता से साथ दिया, वहीं एआईएमआईएम के प्रत्याशी अरशद राणा ने भी जबरदस्त जनादेश लेकर परिणाम को उलटकर रख दिया। उन्होंने भी करीब 18 हजार से ज्यादा मत हासिल किये हैं। मुस्लिम मतों के इसी बंटवारे और मुस्लिम बूथों पर कम मतदान प्रतिशत रहने के कारण भाजपा व रालोद प्रत्याशी की जीत हुई है। इस क्षेत्र से मिथलेश पाल ने 15 साल बाद दूसरा उपचुनाव जीता है। वो 2009 में मोरना विधानसभा सीट से उप चुनाव में ही विधायक निर्वाचित हुई थी। इसके 2012 और 2017 में भी मिथलेश पाल ने इसी क्षेत्र में रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाई। अब भाजपा के रास्ते उनको रालोद से टिकट मिला और वो उप चुनाव में विधायक निर्वाचित हुई हैं।
मीरापुर विधानसभा के उपचुनाव में 20 नवम्बर को हुए मतदान के दौरान 57.10 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने वोट डाले थे। यहां पर कुल पंजीकृत 324571 वोटरों में से 185322 ने वोट डाली। मतगणना के बाद आये परिणाम में रालोद प्रत्याशी मिथलेश पाल ने ईवीएम में हुई मतों की गिनती में कुल 184666 मतों में से मिथलेश को कुल 83852 वोट प्राप्त किये। जबकि सुम्बुल राणा 53426 वोट ही हासिल कर सकीं। मिथलेश ने इस चुनावी दंगल में 30426 वोटों के अंतर से सपा की सुम्बुल राणा को हरा दिया। मिथलेश पाल उपचुनाव जीतकर दूसरी बार विधानसभा पहुंची है। इससे पहले साल 2009 में भी वह मोरना से विधायक रही हैं। बसपा प्रत्याशी शाह नजर को 3181 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई। आसपा के जाहिद हुसैन ने 22400 वोट प्राप्त किये तो चौकाने वाली बात यह रही कि एआईएमआईएम के प्रत्याशी अरशद राणा को 18867 वोट मिले। सपा की हार की मुख्य वजह मुस्लिम मतों में जबरदस्त बंटवारे को ही माना जा रहा है। मिथलेश पाल के चुनाव जीतने के बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, एमएलसी वन्दना वर्मा, विधायक प्रसन्न चौधरी, पूर्व मत्री योगराज सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक, विजय शुक्ला, प्रभात तोमर सहित पार्टी के सैंकड़ों कार्यकर्ता मतगणना स्थल पर पहुंचे और जीत पर खुशी जाहिर करते हुए मिठाई बांटी।

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