मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। इण्डियन रेडक्रॉस सोसाइटी जनपद मुज़फ्फरनगर के अध्यक्ष/जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देशन में विश्व रेडक्रॉस दिवस “मानवता में एकता” की थीम के साथ मनाया गया। सर जीन हेनरी ड्यूनेंट के जन्मदिन को विश्व रेड क्रॉस दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन का संस्थापक माना जाता है।
विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर मानवता के लिये कार्य करने वाली 08 स्वयं सेवी महिलाओं दीपाली कौशिक, विनोद चौहान, प्रेमबाला, रजनी तनेजा, सोनिया सिंह, रुचि शर्मा, शिल्पा व पूनम को सम्मानित किया गया।

“मानवता में एकता” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। डॉ राजीव कुमार द्वारा
उक्त आयोजन के जीबीवी नगर क्षेत्र मुज़फ्फरनगर में किया गया। उक्त कार्यक्रम में अतिथि के रूप में कुसुम वर्मा सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी रही। उक्त आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी होतीलाल शर्मा द्वारा की गई। कार्यशाला में डॉ राजीव कुमार द्वारा बालिकाओं को विश्व रेडक्रॉस दिवस के विषय मे विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। 08 मई को विश्व रेडक्रॉस और रेड क्रिसेंट दिवस (World Red Cross and Red Crescent Day) के रूप में मनाया जाता है, जो युद्ध और आपदाओं में निस्वार्थ सेवा करने वाले वालंटियर्स को समर्पित है। हेनरी ड्यूनेंट जयंती और विश्व रेड क्रॉस दिवस के मुख्य बिंदु: जन्म: 8 मई, 1828 (जिनेवा, स्विट्जरलैंड)
महत्व: हेनरी ड्यूनेंट ने ‘सोल्फेरिनो की स्मृति’ पुस्तक के माध्यम से युद्ध में घायलों की मदद के लिए एक तटस्थ राहत संगठन की नींव रखी।
पहला नोबेल शांति पुरस्कार: 1901 में, उन्हें मानवतावादी कार्यों के लिए पहला नोबेल शांति पुरस्कार मिला। यह दिन रेड क्रॉस के 07 मूलभूत सिद्धांतों – मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वैच्छिक सेवा, एकता और सार्वभौमिकता का जश्न मनाता है। इस वर्ष 8 मई को उनकी जयंती पर मानवता की सेवा और पीड़ितों की रक्षा का संदेश दिया जा रहा है।

प्रदेश में बढ़ रहा महिलाओं और बच्चियों के साथ शोषण-महंत शिवम गिरी
हरिद्वार (रिपोर्टर)। चंपावत प्रकरण को लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महंत शुभम गिरी के नेतृत्व में ज्वालापुर में पुल जटवाड़ा पर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महंत शिवम गिरी ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।





