मुजफ्फरनगर। पालिका परिषद् की दिशा व दशा बदलने के साथ अब सभी 55 वार्डों में पड़ी अचल संपत्तियों को टैक्स के दायरे में लाने की कवायद शुरू हुई है, जिसमें नगर पालिका के नव विस्तारित क्षेत्र के साथ पालिका में शामिल हुए 15 गांवों की संपत्तियों को शामिल करने की तैयारी हो रही है। इसमें पालिका कर विभाग ने विस्तारित क्षेत्र समेत शहर में करीब 1.80 लाख संपत्ति होने का आंकलन किया है। इनमें खाली प्लॉट को शामिल करते हुए प्लॉट पर भू-स्वामी से टैक्स वसूलने का प्लान बनाया है। इसके लिए सर्वे पूर्ण होने का इंतजार किया गया है। ड्रोन सर्वे में आने वाले सभी खाली प्लॉट पर भी वार्षिक टैक्स वसूला जायेगा। अभी तक पालिका द्वारा खाली प्लॉट पर कोई टैक्स नहीं लिया जाता है।
नगर पालिका परिषद के कर विभाग में वर्तमान परिवेश में क्षेत्र का करीब 84 हजार घरेलू और व्यावसायिक संपत्तियों का रिकॉर्ड दर्ज है। ऐसे में इन संपत्तियों पर पालिका द्वारा गृह और जल कर वसूला जा रहा है। पूर्व में पालिका में 15 गांवों को भी शामिल करते हुए विस्तार किया गया, जिनमें 11 गांव की आबादी भी शामिल है। यहां अभी तक पालिका टैक्स निर्धारण नहीं कर पाई है। इसके लिए पालिका द्वारा एरियल सर्वे कराते हुए पूरा डिजिटल रिकॉर्ड जुटाने की योजना बनाई गई है। इसमें नव विस्तारित क्षेत्र के साथ पूर्ण शहरी क्षेत्र में अचल संपत्तियों पर टैक्स वसूलने की तैयारी है। कर विभाग ने अभियान के तहत पालिका के मौजूदा 55 वार्डों में 1.80 लाख प्रॉपर्टी होने का एक आंकड़ा अभी तय किया है। इसमें खाली प्लॉट भी शामिल किए गए हैं, वहीं घरेलू तथा व्यावसायिक भवन भी हैं। पालिका की तैयारी है कि भविष्य में पालिका क्षेत्र में आबादी में आने वाले भू-खंडों पर भी टैक्स निर्धारण करते हुए वसूली की जाये। योजना पर टैक्स विभाग ने काम शुरू कर दिया है, जिससे पालिका की आय में बढ़ोतरी होने के साथ पालिका क्षेत्र को क्लीन एंड ग्रीन बनाने की योजना को भी धरातल पर लाया जा सके।
इन्होंने कहा-
कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार यादव ने बताया कि सम्पूर्ण नगरीय क्षेत्र का पालिका की ओर से एरियल सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें नव विस्तारित क्षेत्र के भवनों और खाली भू-खंडों का रिकॉर्ड जुटाया जायेगा। उन्होंने बताया कि नये क्षेत्र में भी भवनों पर टैक्स लगाने के साथ ही सम्पूर्ण नगर क्षेत्र के भू-खंडों पर भी टैक्स लगाने की योजना है। अभी तक पालिका द्वारा खाली पड़े भू-खंडों पर कोई भी टैक्स नहीं लिया जा रहा है।






