मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद में चल रहे ठेकेदारों के पुल विवाद में गुरूवार दोपहर बाद उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब कुछ ठेकेदारों को पालिका में पालिका क्षेत्र में होने वाले सड़क निर्माण कार्यों के टैंडर डाले जाने से रोक दिया गया। पालिका में टैंडरों को लेकर चल रहे खेल की शिकायतों के बीच ताजा मामले की पीड़ित ठेकेदारों ने जब डीएम दरबार में शिकायत की तो डीएम के निर्देश पर पालिका पहुंचे नगर मजिस्ट्रेट विकास कश्यप ने टैंडर प्रक्रिया की जानकारी लेने के साथ वहां मौजूद ठेकेदारों के टैंडर भी वहां मौजूद पेटिका में जमा कराए, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।
नगरपालिका निर्माण विभाग में गुरूवार को नगर क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की टैंडर की प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान बताया जा रहा है कि ठेकेदार अभिमन्यु चौहान व ठेकेदार तुषार पसीचिया पालिका में पहुंचे, जिन्हें वहां पर मौजूद कुछ सभासदों ने उन्हें टेंडर भरने से रोक दिया गया। ठेकेदारों ने मामले की शिकायत डीएम को करते हुए उन्होंने बताया कि पालिका सभासद मनोज वर्मा व राजीव शर्मा द्वारा उनके साथ गाली-गलौज, धक्का मुक्की करके उन्हें जान से मारने की धमकी दी और उन्हें टेंडर भरने से रोका गया। उन्होंने दोनों सभासदों समेत दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। डीएम उमेश मिश्रा ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नगर मजिस्ट्रेट विकास कश्यप को मौके पर भेजा। नगर मजिस्ट्रेट विकास कश्यप ने सभी तथ्यों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि डीएम के आदेश पर सारे निर्माण टैंडर आॅनलाइन करने के आदेश हुए थे लेकिन नगर पालिका में ई-टैंडर के बावजूद कुछ कागज पालिका में जमा करने होते हैं, तभी टैंंडर पूरी तरह से माना जाता है। गुरूवार को हुई उक्त टैंडर प्रक्रिया को लेकर नगरीय क्षेत्र में तमाम चर्चाएं होती रही। उक्त मामले में पूर्व में वार्ड सभासद देवेश कौशिक ने पालिका की टैंडर प्रक्रिया में पूल होने की शिकायत की थी।
उधर, वार्ड सभासद मनोज वर्मा ने ठेकेदारों द्वारा लगाए गए आरोपों को साजिश बताते हुए कहा कि टैंडर प्रक्रिया के दौरान उनका व सभासद राजीव शर्मा का नाम वास्तव में राजनीतिक द्वेष के कारण लिया जा रहा है। टैंडर प्रक्रिया में किसी को रोके जाने या धमकी देने के आरोपों को निराधार बताते हुए ठेकेदारों की टैंडर प्रक्रिया के दौरान अपनी लोकशन नहीं होने की बात की है।







