मुजफ्फरनगर। करीब छह साल पूर्व कृषि विभाग के अफसरों की फजीहतों का कारण बने फार्म मशीनरी बैंक योजना में किसानों को हुए कृषि यंत्र वितरण में धांधली-बंदरबांट की गंभीर शिकायत का जिन्न एक बार फिर बंद हुई बोतल से बाहर आ गया है। इस मामले में डीएम उमेश मिश्रा ने अब सीडीओ को शिकायत के सभी बिन्दुओं पर जांच करते हुए 15 दिनों में जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने शिकायतकर्ता द्वारा जांच के बाद भी कार्यवाही न होने के आरोपों के बीच निर्णय लिया। सीडीओ ने मामले से जुड़े दस्तावेज तलब कराने को कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष सुमित मलिक द्वारा 29 अगस्त 2018 को तत्कालीन डीएम के साथ शासन में भी पत्र लिखकर शिकायत की थी कि कृषि विभाग के अधीन संचालित फार्म मशीनरी बैंक कृषि यंत्र वितरण योजना में जनपद में अपात्र व्यक्तियों को धांधली करते हुए योजना का लाभ प्रदान किया गया है, जबकि पात्र किसानों को आवेदन के बाद भी योजना में कृषि यंत्र पाने से वंचित कर दिया गया है। सुमित मलिक ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया था कि कृषि विभागीय अफसरों ने योजना में बंदरबांट करते हुए ऐसे लोगों को कृषि यंत्र उपलब्ध करा दिए जो किसान भी नहीं हैं। सुमित मलिक की शिकायत पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन कृषि उत्पादन आयुक्त ने 31 अगस्त 2018 को डीएम को जांच कराने के निर्देश दिए थे। उस समय डीएम ने सीडीओ को जांच सौंपी थी। सीडीओ ने सितम्बर 2018 में डीडी कृषि से जांच कराई थी, जिसके बाद जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन इस जांच का कोई असर नजर नहीं आया और न कार्यवाही की गई। वर्ष 2018 से लगातार सुमित मलिक इस मामले में जांच आख्या पर कार्यवाही की मांग करते रहे हैं। इसके लिए उनके द्वारा शासन-प्रशासन के साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल, डीएम वार रूम समेत अन्य प्लेटफार्म पर अपनी शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब फिर से सुमित मलिक ने डीएम उमेश मिश्रा से शिकायत करते हुए 2018 में हुई जांच के तथ्य सार्वजनिक करने और इसमें कार्यवाही कराने की भी मांग की। डीएम उमेश मिश्र ने प्रकरण में सीडीओ संदीप भागिया को मामले में 29 अगस्त 2018 के उक्त शिकायती पत्र पर बिन्दुवार जांच करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।
इन्होंने कहा-
सीडीओ संदीप भागिया ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जांच प्रारम्भ कर दी गई है। कृषि विभाग से 2018 में हुई जांच से संबंधित पत्रावली व योजना के दस्तावेज व पात्रों की सूची तलब की गई है।






