मुजफ्फरनगर। कलेक्ट्रेट के पुराने भवन एक के बाद एक लगातार दरकने शुरू हैं, लेकिन जिम्मेदार मामले में कोई कदम उठाने के बजाए सिर्फ विकल्प तलाशने से अधिक कुछ करते दिखाई नहीं देते हैं। पूर्व में कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय के भीतरी कक्ष के यूं ही भरभराकर गिर जाने के बाद अफसरों ने उक्त भवन को गिराने के साथ जिला पंचायत सभागार के एक कोने को अस्थाई रूप से कब्जे में लेकर डीएम कार्यालय शुरू कर दिया, लेकिन टूटे हुए भवन की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इससे पूर्व कलेक्ट्रेट में चकबंदी अधिकारियों की छत कई माह तक टूटी रहने के बाद में ठीक कराई थी, अभी इसी भवन का कुछ भाग पुराना होने के साथ जर्जर हालत में है, वहीं रिकार्ड रूम का बड़ा भाग ऐसी हालत में हादसों को निमंत्रण दे रहा है, मगर सुधार की उम्मीद में रोज एक दिन बीत रहा है।
सरकारी काम अपनी धीमी गति से चलता है, यह बात सुनी जाती रही है, लेकिन अपनों की जान जोखिम में डालकर जिम्मेदार इस हद तक पहुंच जाएंगा, ऐसा बहुत कम सुनने को मिलता है। शुक्रवार दोपहर रोजमर्रा की तरह मनोरंजन विभाग का कार्यालय भी खुला और प्रोबेशन विभाग से जुड़ी कर्मचारी बाहरी परिसर में बैठी अपना काम देख रही थी, तभी कार्यालय के भीतरी क्षेत्र में जोर की आवाज हुई, जिसे सुनते ही वहां भगदड़ मच गई। बेहतर रहा कि उस वक्त दफ्तर में मैडम नहीं थी, वहीं पास में रखा हुआ कंप्यूटर भी ऊपर से गिरे मलवे की जद में आने से भी बच गया, नहीं तो कलेक्ट्रेट में बड़ा हादसा भी हो सकता था। कहना गलत न होगा कि कलेक्ट्रेट में मनोरंजन कार्यालय के इस भवन के साथ सामने रिकार्ड रूम में बड़ी संख्या में जर्जर भवन हादसों को प्राय: निमंत्रण दे रहा है, जिसमें सुधार के राजस्व परिषद के अध्यक्ष ने अधिकारियों को जर्जर भवन के पुन:निर्माण कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन बदलाव की दिशा में अभी तक कोई सुधार कलेक्ट्रेट में होता नजर नहीं हो रहा है।






