हरिद्वार (रिपोर्टर)। श्री गंगा सभा के तत्वावधान में हरकी पैड़ी पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम प्रसंग में कथाव्यास पुण्डरीक गोस्वामी श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और सत्संग का संदेश देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को धर्म और सत्य के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य गंगा है। जिस प्रकार गंगा का जल मनुष्य के तन को पवित्र करता है, उसी प्रकार भागवत कथा मन और आत्मा को निर्मल बनाती है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान का स्मरण, नाम संकीर्तन और संतों का संग ही मानव जीवन का सबसे बड़ा सहारा है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करता है, उसके जीवन के दुःख और कष्ट स्वतः दूर होने लगते हैं।
कथा विश्राम के अवसर पर उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि केवल कथा सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके संदेशों को जीवन में उतारना भी आवश्यक है। गोस्वामी ने बताया कि भागवत हमें प्रेम, करुणा, त्याग और मानव सेवा की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने का सबसे सरल मार्ग निष्काम भक्ति है। जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर प्रभु की शरण में जाता है, तभी उसके जीवन में सच्चा आनंद आता है। श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम अवसर पर उपस्थित सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं आयोजन से जुड़े सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि हरिद्वार की पावन भूमि पर आयोजित इस दिव्य कथा में जिस प्रकार श्रद्धालुओं ने उत्साह और भक्ति के साथ सहभागिता की, वह अत्यंत प्रेरणादायक और अविस्मरणीय रहा। उन्होंने विशेष रूप से कथाव्यास पुंडरीक गोस्वामी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके श्रीमुख से निकली भागवत कथा ने सभी भक्तों के हृदय को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। कथा श्रवण करने वालों में श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, सभापति कृष्ण कुमार, उपाध्यक्ष हनुमंत झा, स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि, समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान, उज्जवल पण्डित, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान सहित बड़ी संख्या में श्रद्वालु मौजूद रहे।

धूमधाम से मनेगा श्री गणेश जन्मोत्सव, भरतिया कॉलोनी में सज रहा गणपति दरबार
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। भरतिया कॉलोनी स्थित श्री गणपति खाटू श्याम मन्दिर परिवार द्वारा इस वर्ष भी श्री गणेश जन्मोत्सव को बेहद भव्य और हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मन्दिर परिवार समिति के संरक्षक भीमसेन कंसल ने इस पावन महोत्सव की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सनातन धर्म में






