मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जिले के एनसीआर में शामिल होने से परिणाम सामने आने लगे हैं, भले ही जनपद को एनसीआर में आने का कोई बड़ा लाभ अभी न मिला हो, लेकिन इसकी जद में सड़कों से हाइवे तक दौड़ने वाले करीब 2.13 लाख वाहन अब सड़कों पर नहीं दौड़ सकेंगे। इन तमाम वाहनों के परिवहन विभाग ने संचालन पर रोक लगा दी है। इसकी जद में जनपद में डीजल के दस साल और पेट्रोल के 15 साल पुराने 2 लाख 13 हजार 396 वाहनों का संचालन अब प्रतिबंधित हो गया है। परिवहन विभाग की ओर से इन तमाम वाहनों की मियाद पूरी हो गई है। ऐसे तमाम वाहनों का संचालन बंद कराने के लिए अब परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों को नोटिस जारी किए है।
जी हां, यही है एनसीआर क्षेत्र में मुजफ्फरनगर जिले के शामिल होने के बाद का वास्तविक सच। परिवहन विभाग के अनुसार जिले में डीजल के दस साल और पेट्रोल के 15 वर्ष पुराने वाहनों के भविष्य में संचालन पर प्रतिबंध है। उनका तर्क है कि ऐसे तमाम वाहनों के संचालन से एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरण दूषित होता है। परिवहन विभाग द्वारा चिन्हित किए वाहनों में जनपद में करीब 2 लाख 13 हजार 396 वाहनों को चिन्हित किया है, जिनकी मियाद पूरी हो गई है। इन वाहनों में डीजल के 10 वर्ष पुराने 77,142 वाहन व पेट्रोल के 15 वर्ष पुराने कुल 1,36,254 वाहन शामिल किए गए हंै। इन वाहनों के संचालन एनसीआर क्षेत्र में प्रतिबंधित हो गया है। एआरटीओ प्रशासन ने इन वाहनों का संचालन को बंद कराने के लिए संबंधित वाहन स्वामी के पास नोटिस भेजा है। ऐसे में भविष्य में ऐसे तमाम वाहन कबाड़ बन गए हैं, जिनका पुलिस या परिवहन विभाग की जद में आ जाने पर चालान निश्चित है, इससे इंकार ही नहीं किया जा सकता।
इन्होंने कहा-
एआरटीओ प्रशासन अजय मिश्रा ने बताया कि जनपद में करीब 2.13 लाख वाहनों का निर्धारित समय पूर्ण हो गया है। इन वाहनों की मियाद खत्म हो जाने के साथ ही भविष्य में इनके संचालन को प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इन चिन्हित वाहनों में 10 वर्ष पुराने डीजल के 77,142 वाहन और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल के 1,36.254 वाहन शामिल हैं। उक्त तमाम वाहन स्वामियों को इस संबंध में नोटिस जारी किए गए हंै, ताकि वाहन स्वामी समय रहते व्यवस्था कर सकें।





