मुजफ्फरनगर। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) भारत में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है, जिसका उद्देश्य इस योजना के तहत, ग्रामीण इलाकों के परिवारों को वर्ष में कम से कम सौ दिनों का रोजगार दिया जाए। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद वास्तव में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की हर स्थिति में आजीविका सुरक्षा बढ़ाना है। बीते दिवस विकास भवन सभागार में संपन्न दिशा की बैठक में सांसद ने अधिकारियों को मनरेगा की धनराशि बढ़ाने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जाने के निर्देश दिए, ताकि पात्रों की माली हालत को सुधारा जा सके।
शासन स्तर से महात्मा गांधी ग्राम रोजगार गारंटी योजना में पंजीकृत मजदूर को साल भर के दौरान 100 दिन काम दिए जाने का नियम निर्धारित है, लेकिन अभी तक जनपद में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 699 परिवारों को ही 100 दिन का रोजगार मिला है। इन परिवारों में अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के मजदूरों को 26.50 प्रतिशत एवं पंजीकृत महिला जॉबधारकों को 37.65 प्रतिशत मानव दिवस सृजन किया गया है। जिले के सभी नौ ब्लाकों में एक्टिव जॉब कार्डधारकों की संख्या वर्तमान में 42,754 हजार हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 15 जनवरी तक 14.36 लाख मानव दिवस सर्जन किए जाने का लक्ष्य रखा था लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष 8.11 लाख ही मानव दिवस सर्जन हो पाए हैं। यहां पर करीब 699 परिवारों को सौ दिन का रोजगार दिया गया। जिले में करीब 3,187 नवीन कार्य प्रगति पर है। औसतन एक परिवार को मात्र 45 दिन रोजगार उपलब्ध कराया गया है जो कि नियम व मानक के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष में अब तक मनरेगा कार्यों में करीब 2728 77 लाख रुपये मजदूरी पर 101.41 लाख रुपये अर्द्धकुशल और 578.70 लाख रुपये सामग्री पर अब तक धनराशि खर्च की गई है।
इन्होंने कहा-
मनरेगा डीसी प्रमोद यादव का कहना है कि जनपद में मनरेगा के तहत कार्य योजना तैयार कर मजदूरों को काम उपलब्ध कराया जाता है। वहीं विभागीय स्तर पर कोशिश रहती है कि सभी मजूदरों को काम मिल सके, लेकिन यह सब कुछ बजट पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्यों में करीब 2728 77 लाख रुपये मजदूरी पर 101.41 लाख रुपये अर्द्धकुशल और 578.70 लाख रुपये सामग्री पर धनराशि खर्च की गई है।







