मंसूरपुर महापंचायत निरस्त, देर सायं डीएम कैंप कार्यालय पर ग्रामीणों संग बैठ बनी सहमति

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मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर डिस्टलरी-खानुपुर गांव स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर की जमीन से जुड़े प्रकरण में बीते चार दिनों से जारी हाई प्रोफाइल मामले में विभिन्न सामाजिक, एवं धार्मिक संगठनों द्वारा महापंचायत का ऐलान शनिवार देर सायं उस वक्त पटाक्षेप हो गया, जब डीएम उमेश मिश्रा की पहल पर ग्रामीणों के साथ हुई समझौता वार्ता के बाद महापंचायत निरस्त कर दी गई। इस मामले में जहां एक ओर ग्रामीणों ने महापंचायत का ऐलान करते हुए मोर्चा खोल दिया था, वहीं उनके समर्थन में जनपद के विभिन्न संगठनों ने महापंचायत में शामिल होने की घोषणा करते हुए प्रशासन की सिरदर्द बढ़ा दिया था। शनिवार देर सायं उक्त मुद्दे को लेकर डीएम कैंप कार्यालय पर हुई समझौता वार्ता के बाद में ग्रामीणों ने महापंचायत निरस्त करने की घोषणा करते हुए मिल बैठकर उक्त समस्या का निस्तारण कर लेने की बात की। मंसूरपुर में होने वाली महापंचायत को ले कर वेस्ट यूपी में हड़कंप मचा हुआ था, जिसमें देर रात्रि वार्ता के बाद दोनों पक्षों के साथ जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली।
मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाना क्षेत्र में बीते दिनों पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान की ओर से मंसूरपुर में अपने समर्थकों के साथ पहुंचकर हंगामा किए जाने के बाद सुर्खियों में आए प्रकरण में मंसूरपुर इंस्पेक्टर और पूर्व मंत्री डॉ. संजीव बालियान के बीच में हुई बहस के बाद मामला तब और बढ़ गया था, जब स्थानीय पुलिस प्रशासन ने पूर्व मंत्री की सुरक्षा में कटौती कर दी गई थी। मंसूरपुर डिस्टलरी के पास खानूपुर गांव में लक्ष्मी नारायण मंदिर की जमीन को लेकर जारी विवाद में ग्रामीणों का दावा है कि पिछले कुछ दिन पूर्व डिस्टलरी की ओर से दीवार बनाकर जमीन पर कब्जा कर लिया गया था, जिसे लेकर ग्रामीणों की ओर से विरोध जताया गया, लेकिन तब स्थानीय पुलिस ने काम रूकवाने के लिए इंकार कर दिया और कह दिया कि कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं। पूर्व मंत्री के साथ हुए हंगामे के बाद स्थानीय पुलिस ने ग्राम खानूपुर में मंदिर की जमीन प्रकरण में ग्राम प्रधान राजीव धनगर समेत 10 ग्रामीणों और 4 डिस्टिलरी कर्मियों को इस बीच मुचलका पाबंद किया था। इस मामले में हुई कार्रवाई के बीच ग्रामीणों ने 19 जनवरी को महापंचायत का ऐलान किया था। ग्रामीणों के महापंचायत के इस ऐलान के बाद विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने महापंचायत का समर्थन करते हुए प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी। बीते दिवस इस महापंचायत को लेकर जहां एक ओर शुकतीर्थ में साधु-संतों में दो फाड़ हो गई थी, जिसमें एक पक्ष ने महापंचायत में शामिल न होने का ऐलान किया, वहीं सायं को दूसरे पक्ष ने महापंचायत में शामिल होने का ऐलान करते हुए जिला प्रशासन की चिंता को बढ़ा दिया। इस बीच हिन्द मजदूर किसान समिति के पदाधिकारियों के साथ पाल समाज, त्यागी और ब्राह्मण समाज ने महापंचायत में शामिल होने का ऐलान कर दिया। वहीं विभिन्न हिन्दू संगठनों ने भी इस आंदोलन में कूदने का ऐलान कर दिया था। तमाम कयासों के बीच शनिवार देर सायं मुख्यालय पर डीएम कैंप कार्यालय पर संपन्न समझौता वार्ता में डीएम उमेश मिश्रा की पहल पर संपन्न बैठक में खानूपुर महापंचायत को निरस्त कराने में प्रशासन सफल साबित रहा। समझौता वार्ता में खानूपुर के ग्रामीणों के साथ अधिकारी भी मौजूद रहे।
बता दें, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने आरोप लगाया था कि पुलिस डिस्टलरी का पक्ष ले रही है और ग्रामीणों के साथ इस मामले में अन्याय हो रहा है। भाजपा सरकार में पुलिस मंदिर की भूमि पर कब्जा करने में मदद करेगी ये किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, पुलिस को दोनों पक्षों की सुननी चाहिए।

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