भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत की वर्तमान राजनीतिक पर बेबाक बातचीत

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भारतीय किसान यूनियन के मुखिया एवं बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि भारत के किसानों का दुर्भाग्य है कि जो भी राजनीतिक दल सत्ता में रहता है वह सत्ता में आने से पहले तो किसानों के भले की बात करता है । किसानों को फसलों का सही मूल्य, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, किसानों की आय की चिंता करते दिखता है ,लेकिन जैसे ही उसे सत्ता प्राप्त होती है तो किसान उसके एजेंडे से बाहर हो जाता है। भाकियू मुखिया चौधरी नरेश टिकैत ने आज किसान राजधानी सिसौली में किसान चिंतक एवं वरिष्ठ पत्रकार कमल मित्तल के साथ बातचीत में कहा कि सत्ता में आते ही किसानों के लिए अनेक योजनाएं बनाने का दावा करने वाली पार्टी किसानों की जगह भारत के कुछ गिने चुने उद्योगपतियो को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों का शोषण करने पर तुल जाती है।
सवाल- 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बिगुल बज गया है , विभिन्न राजनीतिक दल एवं समाज के प्रत्याशी तैयार है। क्या लगता है आपको?
जबाब – भारत की अधिकांश जनसंख्या गांवो में निवास करती है। गांवो में किसान और मजदूर का ऐसा गठबंधन है जो देशवासियों के लिए अन्न एवं अन्य आवश्यक चीजों का उत्पादन करता है। किसान के रूप में कहीं जाट जाति के लोग प्रमुखता के साथ रहते हैं तो कहीं ठाकुर ,कहीं गुर्जर कहीं त्यागी और कहीं मुस्लिम व अन्य समाज के लोग ,लेकिन मजदूर के बिना खेती किसानी करना एक दुर्भर कार्य है। इस लोकसभा चुनाव में पहली बार मजबूत जातियां ठाकुर, त्यागी, कश्यप समाज के लोगों ने अपने-अपने समाज के नाम पर 36 बिरादरियों के सहयोग से लोकसभा चुनाव लड़ने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है जिससे राजनीतिक दलों के समीकरण बिगड़ गए हैं। पूर्व में लोकसभा या विधानसभा चुनाव राजनीतिक दलों के नाम पर ही होते थे लेकिन इस बार कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने विभिन्न समाजों के बारे में कुछ टिप्पणियां कर उन्हें लोकसभा चुनाव में उतरने के लिए आगे लाने का काम किया है। ऐसे में विभिन्न समझो के जो प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं उनके चुनाव लड़ने से कई सीटों पर लोकसभा चुनाव के समीकरण में जरूर अंतर आएगा और नतीजा कुछ अलग होगा।
सवाल- पिछले लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में किसानों ने जबरदस्त रूप से भारतीय जनता पार्टी को मतदान किया था इससे किसानों को कितना लाभ पहुंचा, आपका क्या कहना है?
जबाब -लोक सभा चुनाव 2014 एवं 2019 में किसानों ने जबरदस्त रूप से भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिया था और उम्मीद जताई थी की किसानों को अपनी फसलों का वाजिद दाम मिलेगा, एमएसपी पर कानून बनेगा, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाएगी और देश किसानी पर आधारित है ऐसे में किसानों की सुनवाई सबसे अधिक होगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया लगातार किसानों की उम्मीद है तार-तार होती रही और देश की सरकार कुछ औद्योगिक घरानों के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई।
सवाल- पिछले 10 साल में किसानों ने कई बार आंदोलन किये ,एक आंदोलन बहुत बड़ा चला जिसमें लगभग लगभग 700 किसान शहीद हो गए, इस बारे में आपका क्या कहना है?
जबाब -भारत में पूर्व में भी सरकारें रही है , जब किसान अपनी समस्या को लेकर दिल्ली पहुंचता था तो देश के प्रधानमंत्री उनसे मिलकर उनकी बातें सुनते थे और अधिकांश समस्याओ का निराकरण कराकर किसानों को वापस भेज देते थे। एक बार तो देश के प्रधानमंत्री ने वोट क्लब पर किसानों के धरने को देखते हुए अपनी रैली का स्थल वोट क्लब से बदलकर लाल किला मैदान कर लिया था।लेकिन अबकी बार निजाम बदला हुआ था और किसानों की सरकार ने किसानों को एक बार भी दिल्ली में एंट्री नहीं दीऔर तो और किसानों को कभी आंदोलनजीवी, कभी खालिस्तानी कहां। किसानों पर विदेशी फंडिंग से आंदोलन करने के आरोप लगाए। लेकिन किसानों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की जहमत नहीं उठाई।
सवाल- विधानसभा चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी के गठबंधन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपेक्षित सफलता प्राप्त की थी ।अब जयन्त चौधरी के अलग हो जाने को आप किस रूप में देखते हैं?
जबाब -रालोद प्रमुख जयंत चौधरी का यह फैसला किसानों को रास नहीं आ रहा है। जयंत चौधरी केवल जाट बिरादरी के ही नहीं बल्कि मुस्लिम व किसान बिरादरी के नेता के रूप में स्थापित हो रहे थे ,लेकिन पता नहीं किस तरह दिगभ्रमित होकर उन्होंने अपने पुराने गठबंधन से हटकर एनडीए में जाने का निर्णय लिया। निश्चित रूप से पुराना गठबंधन एक मजबूत गठबंधन था और जयन्त चौधरी के साथ जाट के साथ मुस्लिम एवं अन्य समाज के लोग मजबूती के साथ जुड़े हुए थे। लेकिन अब स्थितिया बदल गई है जिसका नुकसान भविष्य में जयन्त चौधरी को होता हुआ दिख रहा है।
सवाल – पिछले 10 वर्ष में भारत सरकार के किस मंत्री के कामकाज से आप सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
जबाब -निश्चित रूप से नितिन गडकरी ! देश में सड़कों के मामलों में जबरदस्त कार्य किया है लेकिन उसका उचित सम्मान नितिन गडकरी को मिलता हुआ नहीं दिख रहा है।
सवाल-आपको क्या लगता है कि देश में लोकसभा 2024 के चुनाव में क्या होने वाला है?
जबाब -पिछले कुछ समय से देश में एक अजीब सी स्थिति बनी हुई है सरकार के मंत्री रहते हैं कि फल प्रदेश के चुनाव में हमें इतनी सीट मिलने जा रही है और मां की जनता के विरोध के बावजूद भी उन्हें वहां उसी अनुपात में बहुमत मिलता है ऐसे में लोकसभा चुनाव के बारे में आकलन करना बड़ा दुर्गम कार्य है ।जब भारत के अधिकांश लोग और राजनीतिक दल चाहते हैं कि चुनाव इ वी एम की जगह बेलेट पेपर से हो तो चुनाव आयोग को चाहिए था कि एक बार जन भावनाओं को देखते हुए लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से ही करा कर देख लेते।
सवाल -पिछले कुछ वर्षों में विपक्षी दलों की भूमिका को आप किस प्रकार देखते हैं?
जबाब -पिछले कुछ वर्षों में सत्ताधारी पार्टी ने विपक्षी दलों के नेताओं का मुंह बंद करने का कार्य किया है कभी सीबीआई तो कभी ई डी के द्वारा विपक्षी नेताओं को लगातार एक घेरे के अंदर रखने का कार्य किया गया है वही देश के कुछ ऐसे नेताओं जिन पर भ्रष्टाचार आदि के बड़े मामले थे उन्हें ई डी या सीबीआई से धमकवाकर उनका शुद्धिकरण कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया गया है।
सवाल -लोकसभा चुनाव 2024 में आप किस राजनीतिक दल को एक खाप चौधरी के रूप में एवं भारतीय किसान यूनियन के मुखिया के रूप में समर्थन देना चाहेंगे?
जबाब -हम तो चाहते हैं कि देश में ऐसी सरकार बने जो देश के किसानों एवं मजदूरों के हित की बात सोचे। किसान मजबूत होगा तो व्यापारी भी तरक्की करेंगे ।लेकिन पिछले कुछ समय में किसान मजदूर की खराब हालत के चलते गांव और शहर के व्यापारी भी अपने आप को बुरी हालत में पा रहे हैं। रही बात लोकसभा चुनाव में समर्थन की तो हर व्यक्ति को अपने मताधिकार के प्रयोग करने का हक है ,जो 5 साल में एक बार प्राप्त होता है। हमें अपना मत का प्रयोग बहुत सोच समझकर करना चाहिए ताकि हम एक अच्छे सांसद और देश में एक अच्छी सरकार को चुन सके, जिस देश में किसान मजदूर के साथ-साथ व्यापारी भी खुशहाली का जीवन जी सके।

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