मुजफ्फरनगर। नगरीय क्षेत्र की दिशा व दशा बदलने की दिशा में पालिका द्वारा डोर-टू-डोर कूडा कलेक्शन का कार्य कर रही नई दिल्ली की एमआईटूसी कंपनी द्वारा रोजमर्रा लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है, लेकिन कुंभकरर्णी नींद में सोये पालिका प्रशासन को इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं है। पूर्व में कंपनी से हुए अनुबंध के अनुसार न तो शहरी क्षेत्र में सफाई हो रही है। वहीं तय शर्तो के बीच सभी घरों से प्रतिदिन डोर- टू-डोर कूडा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। बड़ी बात यह कंपनी की गाड़ी तेज आवाज में मौहल्ले से होकर गुजर जाती है, और घर से बाहर कूड़ा लिए परिवार गाड़ी के गुजर जाने पर स्वयं को ठगा सा महसूस करते रह जाते हैं। इसके बावजूद भी पालिका प्रशासन कम्पनी को हर माह लाखों रुपए भुगतान कर रही है, जिसमें कई अधिकारी और कर्मचारियों का निजी स्वार्थ छिपा हुआ दिखाई दे रहा है।
शहरी क्षेत्र में सफाई को लेकर पालिका प्रशासन ने नई दिल्ली की एमआईटूसी कंपनी संग अनुबंध हुआ है। कम्पनी पर अनुबंध में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सड़क किनारे पड़े कूड़े आदि को उठवाने की जिम्मेदारी है। कम्पनी द्वारा उक्त कार्य सही ढ़ग से नहीं किया जा रहा है। वैसे शहरी क्षेत्र में करीब 86 हजार से अधिक भवन है। वहीं पालिका में शामिल हुए 11 गांव में करीब 35 हजार भवन अतिरिक्त है। इन भवनों से प्रतिदिन कम्पनी कूड़ा कलेक्शन नहीं कर पा रही है, जबकि कूड़ा उठाने के लिए पालिका ने कम्पनी को टिपर वाहन दिए हुए है। उधर, कूड़ा लेने के लिए प्रतिदिन गाडियां वार्डो में नहीं पहुंच रही है और अगर पहुंच भी गई तो तेज गति और आवाज में यह कर्मचारी कुछ घरों का कूड़ा उठाकर अपने कार्य की इतिश्री समझ बैठे है। स्थानीय लोग इस व्यवस्था से परेशान है। वहीं कई गाड़ियां शामली रोड पर काली नदी के निकट ही कूड़े को डाल रही है। इसके अलावा शहर की सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर हर ओर लगे हंै। डलावघरों से कूड़ा समय पर न उठाने की शिकायत लगातार मिल रही है। पालिका प्रतिमाह जब कम्पनी पर लाखों रुपए खर्च कर रही है तो फिर ऐसे में कूड़े का निदान न हो पाने में समस्या क्या आ रही है, इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है।







