मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चैयरमैन अशोक बलियान ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार की हार पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बीते दिनों पश्चिम बंगाल में रामनवमी के जुलूस (विशेषकर हावड़ा में) 2024 और 2025 में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही निकले थे। उस समय भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया था कि ममता सरकार की नीतियां “तुष्टीकरण” (appeasement) से प्रेरित हैं। उनका तर्क था कि सरकार “संवेदनशील इलाकों” के नाम पर हिंदू त्योहारों पर पाबंदियां लगाती है, जबकि अन्य समुदायों के आयोजनों के लिए ऐसी शर्तें नहीं रखी जातीं। कांग्रेस भी देश में इसी “तुष्टीकरण” की नीति पर चल रही है।
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने भी अप्रैल 2026 में बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक बयान में रामनवमी के ऐतिहासिक संदर्भ पर सवाल उठा हुए तर्क दिया था कि उन्होंने बंगाल का काफी साहित्य और इतिहास पढ़ा है, लेकिन वहां रामनवमी को एक मुख्य त्योहार के रूप में मनाए जाने का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता। उसका कहने का अर्थ था कि यह त्योहार बीजेपी ने शुरू किया है। बीजेपी नेताओं ने इस बयान को ‘हिंदू विरोधी’ और ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ की राजनीति करार दिया। ऐतिहासिक संदर्भ इस दावे के विपरीत बंगाल में रामनवमी की प्राचीनता सिद्ध करते हैं।
Bengal: An Account of the Country from the Earliest Times by Shoshee Chunder Dutt 1874 के पृष्ठ 187 के अनुसार बंगाल के मुख्य त्योहार दुर्गा पूजा, होली हैं। इनके अलावा लक्ष्मी, काली, जगद्धात्री, कार्तिक और सरस्वती की पूजाएँ, दीवाली, दशहरा और जन्माष्टमी कई अन्य त्योहार भी हैं और साथ ही शिवरात्रि और रामनवमी भी मनाई जाती हैं।
The Ramayana of Valmeeki by C. R. Sreenivasa Ayyangar 1910 के पृष्ठ 358 के अनुसार तत्कालीन बंगाल के दरभंगा ज़िले (बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा) के एक गाँव में रामनवमी के दौरान धार्मिक सभाएँ आयोजित की जाती थीं। इस मेले में लगभग 10,000 लोग शामिल होते थे और उस गाँव में पाँच मंदिर थे, जिनमें राम और सीता की प्रतिमाएँ स्थापित थीं।
A Handbook for Travellers in India and Ceylon including the Provinces of Bengal by John Murray 1892 के पृष्ठ 43 के अनुसार रामनवमी चैत्र मास की नौवीं तिथि को मनाई जाती है। यह भगवान रामचंद्र के सम्मान में मनाई जाती है, जिनका जन्म इसी दिन अयोध्या में हुआ था। इस अवसर पर राम की एक छोटी प्रतिमा को पालने में रखकर उसकी पूजा की जाती है और ‘गुलाल’ नामक लाल रंग का पाउडर उड़ाया जाता है।
The Calcutta Review, Vol. 106: January 1898 by Furrell James 1898 के पृष्ठ 16-17 के अनुसार सन 1837 में बरेली में रामनवमी और मुहर्रम के दौरान दोनों समुदायों में तनाव बढ़ गया था। प्रशासन ने शांति के लिए सेना तैनात की थी, लेकिन सेना हटने के बाद मुस्लिम समुदाय ने हिन्दुओं के ऊपर हमला कर दिया था और शहर में हिंसा भड़क उठी थी। झड़प में कई लोग हताहत हुए थे। इस घटना में शहर के मुस्लिम कोतवाल व् नजीर पर हमलावरों का साथ देने के आरोप लगे थे।
देश के प्रबुद्धजनों द्वारा ममता सरकार के इस तरह के निर्णयों व कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के इस बयान को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के रूप में देखा गया था। आलोचकों का तर्क था कि ये नेता इतिहास को नकार कर वह एक विशिष्ट वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रहे थे और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचा रहे थे।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के अवतरण दिवस पर पाँच दिवसीय भव्य आयोजन
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। गुरुदेव गीता मनीषी महामंडलेश्वर श्री ज्ञानानंद जी महाराज के अवतरण दिवस के संबंध में केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चौहान के ऑफिस पर एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस का आयोजन किया गया। जीओ गीता युवा चेतना के कार्यक्रम संयोजक महंत पंडित मनसुख शर्मा एवं जीओ गीता महिला मंडल की संयोजिका कल्पना चौहान ने बताया कि






