मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा किसानों को सौगात के रूप में खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी का दावा करते हुए जारी घोषणा के बीच किसान संगठनों में नाराजगी दिखाई दी। किसान संगठनों की ओर से सरकार की इस घोषणा को किसानों के साथ धोखा बताया गया। बीते दिवस केंद्रीय कैबिनेट की संपन्न हुई बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने कहा था कि सरकार ने किसानों को सौगात देते हुए खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के लिए एमएसपी में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इसमें दाल, धान और दलहन की फसलों के दामों में भारी बढ़ोतरी कर किसानों के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। पिछले 10-11 वर्षों में खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में भारी बढ़ोतरी की है। सरकार के दावों को लेकर किसान संगठनों में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
भाकियू के प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा खरीफ के फसलों के भाव में बढ़ोतरी की गई है, जिसे एमएसपी का नाम देकर प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश का किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार गारंटी कानून न बनाकर उसे एमएसपी जैसे मुद्दे पर भ्रमित कर रही है। जब तक इसे कानूनी रूप से देश में लागू नहीं किया जाएगा, तब तक देश के किसान का भला होने वाला नहीं है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसान की धरातल पर स्थिति को देखकर आर्थिक संकट से गुजर रहे देश के ग्रामीण खेती वर्ग को बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को गारंटी कानून बनाने का काम करें।

उधर भाकियू अराजनीतिक के प्रवक्ता चौ. धर्मेन्द्र मलिक ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा है कि भारत सरकार द्वारा खरीफ 2025-26 का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिया गया है, इस मूल्य बढ़ोतरी को सी2$50 के आधार पर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि यह घोषणा सी2$50 के आधार पर नहीं है। उन्होंने कुछ फोटो पोस्ट करते हुए इनके हवाले से कहा कि एक फोटो में देख सकते हैं कि अगर मूल्य सी2$50 के आधार पर तय होता तो एमएसपी कितना होता। उन्होंने कहा कि किसान पुत्रों आपको इस तरह के विषयों पर समझ रखना जरूरी है और आपकी प्रतिक्रिया जरूरी है, आप इस तरह के विषयों पर विश्लेषण करना सीखो, कहा कि जहां बात किसान की होगी तो हमारी प्राथमिकता किसान है।






