न्यायालय परिसर के मुख्य गेट पर कब्जा कर दिया धरना

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मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर समेत यूपी के जनपदों में गाजियाबाद में हुई घटना के विरोध में अधिवक्ता सोमवार को हड़ताल पर रहे। इस बीच जिला बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन का कोर्ट परिसर का मुख्य गेट धरना स्थल में दोपहर बाद तक तब्दील रहा। इस बीच अधिवक्ताओं ने कोर्ट की ओर जाने-आने वाले गेट बंद कर दिए। इस बीच अधिवक्ताओं ने मुख्य गेट पर धरना देते हुए पूरी तरह से न्यायिक कार्यो का बहिष्कार करते हुए गाजियाबाद कोर्ट में वकीलों पर किए लाठी चार्ज का विरोध किया। वकीलों की हड़ताल को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया।
सोमवार को जिला एवं सिविल बार एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं अन्य अधिवक्ता जिला बार के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी व सिविल बार अध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह मलिक के नेतृत्व में कोर्ट परिसर के मुख्य गेट पर गाजियाबाद न्यायालय में लाठीचार्ज की जांच एसआईटी से कराने व जिला जज के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही के साथ और उन्हें बर्खास्त करने की मांग को लेकर धरने पर रहे। इस बीच सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह मलिक ने कहा कि जिला मुख्यालय पर सोमवार को गाजियाबाद में हुए लाठीचार्ज के विरोध में हड़ताल पर रहे।
जिला बार के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने बताया कि 29 अक्टूबर को गाजियाबाद जिला जज कोर्ट में सुनवाई के दौरान जिला जज द्वारा अधिवक्ताओं से अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया, जिसके विरोध करने पर निहत्थे अधिवक्ताओं पर पुलिस से लाठी चार्ज कराया गया। उन्होंने जनपद न्यायाधीश को उच्च न्यायालय से तत्काल निलंबन की मांग और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में इस प्रकार की शर्मनाक व दुखद घटनाएं दोबारा घटित न हो और न्यायिक कार्य प्रभावित होने की संभावना से बचा जा सके, यह जरुरी है। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय के नाम एक मांग पत्र जनपद न्यायाधीश को सौंपते हुए अधिवक्ताओं की मांगों का संज्ञान लेने के साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही कराए जाने की मांग की। जनपद न्यायाधीश को अधिवक्ताओं द्वारा सौंपे मांग पत्र में मांग की कि उच्च न्यायालय ऐसे ठोस कदम उठाए जिससे कि भविष्य में किसी अन्य न्यायालय में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं गाजियाबाद के जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार और लाठीचार्ज कराने वाले पुलिस अधिकारियों की तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्तगी की जाए। इसके अलावा लाठीचार्ज में घायल अधिवक्ताओं को क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने व यदि उच्च न्यायालय जांच समिति का गठन करता है तो उसमें हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा नामित प्रतिनिधि भी शामिल किए जाएं। इस दौरान धरने पर मुख्य रूप से सुरेन्द्र कुमार मलिक, सतेन्द्र कुमार, अशोक चौहान, अनिल जिंदल, जितेन्द्र कुमार, जितेन्द्रपाल सिंह, डॉ. मीरा सक्सैना, ओमकार तोमर, प्रवीण खोकर, सौरभ पंवार, विष्णु गर्ग, राहुल शर्मा, दीपक वर्मा, अमित मैनी, मोनिका गौतम, मीनाक्षी द्विवेदी, खुर्रम उस्मानी, आदेश कुमार, अश्वनी शर्मा, राकेश पाल, ललित पंवार समेत अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।

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