मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् पर एनजीटी के द्वारा लगाए 68 लाख रुपए के जुर्माने पर चेयरपर्सन ने अफसरों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल उठाते हुए मामले से जुड़ी पत्रावलियों को तलब करते हुए चेतावनी दी है कि ये कार्यवाही लापरवाही का परिणाम है, जिसमें जुर्माना राशि व्यक्तिगत तौर पर इन अफसरों से वसूलने से पीछे नहीं हटेंगी। फिलहाल उनके द्वारा एनजीटी प्रकरण से सम्बंधित सभी पत्रावलियों को तलब किया गया है, लेकिन अभी उनको पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। चर्चा है मामले में कई पत्रावलियों को गायब कर दिया है, जिससे वित्तीय अनियमितता की आशंका बनी है।
करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद शहर के मौ. किदवईनगर में स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अफसरों की धींगामुश्ती के कारण बंद पड़ा है, जहां पालिका का डंपिंग ग्राउंड बनकर रह गया है। इसके कारण यहां कूड़े के बड़े पहाड़ बन गये हैं। इस लिगेसी वेस्ट का निस्तारण न होने के कारण शिकायतकर्ता फराह खां द्वारा विभिन्न बिन्दुओं पर एनजीटी में पालिका के खिलाफ वाद दायर कर दिया था। इसमें किदवईनगर में स्थित करीब 5.5 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट निस्तारण न होने, शहर में 15 स्थानों पर नियमों के खिलाफ कूड़ा डलावघरों का निर्माण कराने और सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन नहीं कराने और बिना ट्रीटमेंट ही शहर का ड्रेन काली नदी में छोड़े जाने के आरोप लगाए हैं। इस वाद में सुनवाई के चलते एनजीटी ने नगर पालिका ईओ से जवाब मांगने के साथ शिकायत निस्तारण के निर्देश कई बार दिए गए, लेकिन पालिका के स्वास्थ्य विभाग और जलकल विभाग अफसर इसको लेकर गंभीर नहीं दिखें। निर्देशों का पालन न करने पर इस मामले में एनजीटी ने विगत दिवस जारी किए आदेश में नगरपालिका पर 20 हजार रुपए प्रतिदिन से करीब 68 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए जुर्माना राशि 15 दिनों में जमा कराने के आदेश दिए हैं।
जुर्माने को लेकर चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने नाराजगी व्यक्त करते हुए ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह से मामले की पूरी जानकारी लेते हुए सम्बंधित पत्रावलियों को तलब करने का आदेश दिया, लेकिन अभी तक पत्रावली उपलब्ध नहीं हो सकी। बताया गया कि शहर के ड्रेनेज के लिए प्रमुख 8 बड़े नालों को एक स्थान पर जोड़कर उनके ड्रेन को एसटीपी के माध्यम से ट्रीटमेंट करने के बाद ही काली नदी तक पहुंचाने का कार्य किया जाना था। इसमें प्रशासक के समय जलकल विभाग ने टैण्डर निकाले और वर्क आॅर्डर भी जारी कर दिया, पर धरातल पर काम नहीं हुआ। आज भी ये 8 नाले जोड़े नहीं गए और इनका गन्दा व दूषित ड्रेन सीधा काली नदी में जा रहा है। जांच के बाद कई पर गाज गिरना संभावित है। इस प्रकरण से जुड़ी पत्रावली जुटाने को हड़कम्प मचा है।
इन्होंने कहा-
चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि प्रकरण में पालिका के स्वास्थ्य व जलकल विभाग को एनजीटी में जवाब दाखिल करना था। इसमें विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की बात सामने आ रही हैं। हमने ईओ से रिपोर्ट मांगी है कि जुर्माना किस कारण लगा है, पत्रावलियों को मंगाकर पूरी निष्पक्ष जांच कराई जायेगी। जो भी दोषी साबित होंगे उनके खिलाफ कार्यवाही करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
उधर, ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि एनजीटी में फरहा खां बनाम पालिका मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी और जलकल विभाग अधिकारियों को प्रकरण में कार्यवाही करने के साथ ही एनजीटी के दिशा निर्देशों के तहत वाद में पैरवी करने के लिए कहा था, लेकिन लापरवाही बरती गई। अब करीब 68 लाख रुपए जुर्माना पालिका पर लगाया है। पालिका ने प्लांट चलाने के लिए टेंडर निकाला है। शीघ्र प्लांट चालू कराते हुए कूड़ा निस्तारण किया जाएगा।







