मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। योगी सरकार की सार्थक पहल पर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव तक अभी स्वयं को प्रधान जी कहलाने का अधिकार बरककार रखा है। हालांकि प्रधान जी इस बीच कोई नीतिगत फैसला नहीं ले पाएंगे। प्रदेश में शुरू नई व्यवस्था के बीच जनपद में पहली बार 481 ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में नियुक्त हुए प्रधान केवल रूटीन कार्य करेंगे। उक्त प्रशासकों के द्वारा इस बीच कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लिया जाएगा। हालांकि आवश्यकता अनुसार अब नए प्रस्ताव, वित्तीय नीतियां व बडे विकास निर्णय लेने का अधिकारी डीएम के पास ही रहेगा। जनपद मुजफ्फरनगर में वर्तमान में 487 ग्राम पंचायत है। इनमें से छह ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान नहीं है। पूर्व में उक्त प्रधानों की मौत हो चुकी है। छह में से चार ग्राम पंचायतों में सदस्य पर चार्ज है। केवल दो ग्राम पंचायत में अभी किसी पर चार्ज नहीं है। डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम पंचायत नवादा चिरौली में जितेन्द्र कुमार प्रधान की मृत्यु हो चुकी है। काजीखेडा के ग्राम प्रधान खेमचंद की मृत्यु हो चुकी है। मांडी की ग्राम प्रधान साजिदा द्वारा त्याग पत्र दिया जा चुका है। यहां पर सदस्य को चार्ज है। छछरौली में ग्राम प्रधान कविता की मृत्यु के बाद शिक्षा को चार्ज है। भुवापुर के प्रधान राणा प्रताप की मृत्यु के बाद सदस्य प्रीतम सिंह को चार्ज है। भापंगी के ग्राम प्रधान तेजराम की मृत्यु के बाद सदस्य ताराचंद को चार्ज दिया हुआ है। डीपीआरओ ने बताया कि यहां पर अभी कोई प्रशासक नियुक्त नहीं किया गया है। इसके लिए शासन स्तर से निर्णय लिया जाना है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल को पांच वर्ष पूर्ण हो गए है। ऐसे में उनका कार्यकाल खत्म हो गया है, लेकिन योगी सरकार ने ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया है। जनपद में 481 ग्राम पंचायतों में प्रधान प्रशासक बने है। प्रधानों को प्रशासक बनाने के लिए जारी किए आदेश में कुछ मख्य बिन्दुओं का उल्लेख किया गया है। जिसमें कहा गया है कि 27 मई 2026 से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में रूटीन कार्यों का निर्वहन किए जाने हेतु नामित किए जाने के लिए डीएम को प्राधिकृत किया गया है। उक्त प्रशासक द्वारा कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लिया जाएगा। ग्राम पंचायत के प्रशासक द्वारा आत्यावश्क एंव विशेष स्थितियों में नीति विषयक निर्णय संबंधी प्रस्ताव डीपीआरओ के माध्यम से डीएम के समक्ष प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। अब ग्राम प्रधानों को अपनी ग्राम पंचायत में विकास कार्य और निर्माण कार्य कराने के लिए डीएम से अनुमति लेनी होगी।

बता दें उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान संगठनों की मांग थी कि चुनाव होने तक वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाए। इसी के तहत योगी सरकार ने यह फैसला लिया है। यह पहली बार होगा जब पंचायतों में प्रशासनिक समिति के रूप में मौजूदा प्रधान विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान में प्रदेश में कुल 57,694 ग्राम पंचायतें हैं, जहां अब अगले चुनाव तक प्रशासनिक व्यवस्था मौजूदा प्रधानों के हाथों में रहेगी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी कर दिया है, जो अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

मुजफ्फरनगर पुलिस प्रशासन ईद पर्व को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु पूर्णतः सतर्क एवं प्रतिबद्ध
मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। आगामी ईद पर्व को जनपद में शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सकुशल सम्पन्न कराने हेतु मुजफ्फरनगर पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जनपद में सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए जोनल एवं सेक्टर व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस अधीक्षक नगर एवं पुलिस अधीक्षक ग्रामीण द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में






