मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चैयरमैन अशोक बालियान ने किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि के अवसर पर सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के जाट और गुर्जर समुदायों की महिलाओं के बारे में व ब्राह्मण समाज के बारे में दिया गया वक्तव्य बेहद अपमानजनक बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। अशोक बालियान ने बताया कि सपा नेता ने अपने सम्बोधन में कहा था कि जाट और गुर्जर समाज की महिलाएं एक साथ कई-कई पति रखती है। दुर्गा भाग्य पूर्ण बात यह है कि जिस समय राजकुमार भाटी ने यह वक्तव्य दिया, उस समय वहां मंच पर अनेकों नेता बैठे हुए थे,लेकिन वे किसान समाज की महिलाओं के अपमान पर हंसते रहे, जबकि ऐसे मौकों पर गलत बात का तत्काल विरोध किया जाना आवश्यक होता है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा किसी भी समाज की महिलाओं के बारे में अपमानजनक और अशोभनीय टिप्पणी की जाती है, तो यह अत्यंत निंदनीय है। महिलाओं के चरित्र और सम्मान पर इस प्रकार की टिप्पणी अस्वीकार्य है और इसका स्पष्ट विरोध होना चाहिए। यदि युवाओं को अपने समाज के वास्तविक इतिहास और गौरवशाली परंपराओं की पूरी जानकारी नहीं है, तो वे ऐसे बयानों से भ्रमित हो सकते हैं। वे सोचने पर मजबूर हो सकते हैं कि क्या वास्तव में ऐसा कुछ था। या ऐसा कुछ है।
The Cyclopaedia of India and of Eastern and Southern Asia vol 2 by Edward Balfour 1885 के पृष्ठ 422 के अनुसार जाट हिंदू धर्म को मानते हैं, वे कई गोत्रों में बँटे होते हैं। वे अपने ही जाति में शादी करते हैं और वे एक ही पत्नी रखते हैं। सर डेंजिल इबेट्सन (Sir Denzil Ibbetson) – Punjab Castes 1916 पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर और प्रसिद्ध नृवंशविज्ञानी सर डेंजिल इबेट्सन ने ब्रिटिश जनगणना (1881) के आधार पर जाट और गुर्जर समुदायों के सामाजिक ताने-बाने का विस्तृत अध्ययन किया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जाट और गुर्जर पूरी तरह से पितृसत्तात्मक (Patrilineal) समाज हैं, जहाँ वंश पिता के नाम से चलता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समाजों में विवाह एक अनन्य धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था है जिसमें बहुपति प्रथा (Polyandry) जैसी किसी प्रथा का कोई स्थान नहीं है।
डिस्ट्रिक्ट गजेटियर्स (District Gazetteers of Punjab & United Provinces) 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में मेरठ, बुलंदशहर, रोहतक और हिसार जैसे जाट-गुर्जर बाहुल्य क्षेत्रों के लिए ब्रिटिश कलेक्टर्स द्वारा तैयार किए गए ‘डिस्ट्रिक्ट गजेटियर’ (District Gazetteers of Punjab & United Provinces) ऐतिहासिक साक्ष्य हैं। इन सभी गजेटियर्स में इन जातियों की वैवाहिक मर्यादा और कड़े ‘गोत्र नियमों’ (Exogamy) का उल्लेख है। दस्तावेज़ बताते हैं कि एक ही गोत्र या भाईचारे में विवाह पूर्णतः प्रतिबंधित था। ऐसे कड़े सामाजिक नियमों वाले समाज में बहुपति प्रथा या पत्नी साझा करने की बात का ब्रिटिश अधिकारियों ने सिरे से खंडन किया है। इसप्रकार जाट और गुर्जर समुदायों में बहुपति प्रथा (Polyandry) का कोई अस्तित्व नहीं था।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के लिए एक पुरानी और अत्यंत अपमानजनक कहावत का संदर्भ दिए जाने के बाद, उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जबकि ब्राह्मण समाज ऐतिहासिक रूप से शिक्षा, ज्ञान, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति का मुख्य आधार रहा है। औपनिवेशिक काल के कई प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखकों और नृवंशविज्ञानियों (Ethnographers) ने अपनी पुस्तकों में ब्राह्मण समाज के इस योगदान को बहुत ऊंचे शब्दों में दर्ज किया है।
आर्थर एंथोनी मैक्डोनल (Arthur Anthony Macdonell) – A History of Sanskrit Literature (1900) के अनुसार ब्राह्मण समाज केवल धार्मिक कर्मकांडों तक सीमित नहीं था, बल्कि वे खगोल विज्ञान (Astronomy), गणित (Mathematics), व्याकरण (Grammar) और दर्शन (Philosophy) के भी शिक्षक थे। सर हर्बर्ट होप रिस्ली (Sir Herbert Hope Risley) – The People of India (1908) के अनुसार पारंपरिक भारतीय समाज में ब्राह्मणों का शीर्ष स्थान उनके धन या बल के कारण नहीं, बल्कि उनके द्वारा समाज को दी जाने वाली ‘निःशुल्क शिक्षा’ (Guru-Shishya Tradition) और उनके सात्विक जीवन के कारण था। वे समाज के मुख्य मार्गदर्शक, शिक्षक और सलाहकार की भूमिका निभाते थे।
इन सभी प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह साफ है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा दिया गया वक्तव्य न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है, बल्कि इन समाजों के पारिवारिक मूल्यों और संरचना को भी गलत तरीके से प्रस्तुत करता है व उनका जाट और गुर्जर समुदायों की महिलाओं के बारे में तथा ब्राह्मण समाज के बारे में दिया गया वक्तव्य बेहद अपमानजनक है। हम उनके इस तरह के वक्तव्यों की निंदा करते है।

युवा वर्ग का नशे की लत में फंसना बड़ी चिंता का विषय-सुनीता चौधरी
हरिद्वार (रिपोर्टर)। बाल कल्याण समिति की सदस्य सुनीता चौधरी ने कहा कि देश और समाज का भविष्य कहे जाने वाले नौजवान आज तेजी से नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। भांग, सुल्फा, शराब, गांजा और स्मैक जैसे खतरनाक नशे युवाओं की जिंदगी को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। बढ़ती नशाखोरी न केवल






