शुकतीर्थ/मुज़फ्फरनगर (रिपोर्टर)। भागवत नगरी शुकतीर्थ में चल रही विश्वविख्यात कथावाचक पूज्य मोरारी बापू की श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस पर अध्यात्म, मनोविज्ञान और जीवन-दर्शन का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के केंद्र में राजा परीक्षित का प्रसंग रहा, जिसके माध्यम से बापू ने भय, मृत्यु और आत्मबोध जैसे गूढ़ विषयों को अत्यंत सहज, व्यावहारिक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।बापू ने कहा कि भय मनुष्य को भीतर से अशक्त कर देता है—नींद, भूख और प्रतिकार शक्ति सब छिन जाती है, जिससे रोग हावी हो जाते हैं। इसके विपरीत, परीक्षित का चरित्र हमें सिखाता है कि जब व्यक्ति मृत्यु को भी परमात्मा का रूप मान ले, तब भय स्वतः समाप्त हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षित मृत्यु से भयभीत नहीं, बल्कि उसे कृष्ण के रूप में स्वीकार करने के लिए तत्पर थे—यही सच्ची निर्भयता है।कथा में बताया गया कि आत्मबोध (स्वयं को जानना) जीवन का वह बिंदु है, जहां राग और द्वेष समाप्त हो जाते हैं। जैसे ही ये दो मूल विकार समाप्त होते हैं, काम, क्रोध, लोभ और मोह भी स्वतः शांत हो जाते हैं। परीक्षित का शरीर भले उपवास में था, लेकिन आत्मिक ऊर्जा से वह पुष्ट बने रहे—क्योंकि वे ‘भागवत रूपी गंगा’ का पान कर रहे थे।मोरारी बापू ने कहा कि “शब्द भी औषधि है और स्पर्श भी”।किसी संत का आश्वासन व्यक्ति के आधे कष्ट हर लेता है, और उनका स्पर्श पीड़ा को शांत कर देता है। उन्होंने गोपी गीत को ‘प्रवृत्ति से आगे बढ़कर प्रपत्ति (शरणागति)’ का प्रतीक बताया—जहां मनुष्य पूर्णतः परमात्मा में समर्पित हो जाता है।कथा में यह भी संदेश दिया गया कि इस संसार में तीन चीजें अत्यंत दुर्लभ हैं—मनुष्य जन्म, मोक्ष और किसी सद्गुरु का सान्निध्य—और परीक्षित को ये तीनों प्राप्त हुए, जिससे वे भाग्यशाली बने। बापू ने कहा कि जो निष्कपट होकर परमात्मा की शरण में जाता है, वही सच्चे अर्थों में अभय हो सकता है।वहीं बापू ने अपनी कथा में बंगाल के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण के भक्तों ने हरे कृष्ण हरे कृष्ण जपते जपते मतदान किया और वह काम कर गया,बंगाल में सनातनियों की सरकार बन गयी।

बापू बोले कि ममता हो या समता लेकिन सनातन का विरोध नही होना चाहिये।चतुर्थ दिवस की कथा में मोरारी बापू द्वारा भगवान शिव-पार्वती विवाह और श्रीराम जन्म के प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। श्रीराम के अवतरण के कारणों को सरल भाषा में समझाते हुए बापू ने सनातन मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला।कथा स्थल पर भक्ति के साथ-साथ व्यवस्थाओं का भी उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। भंडारा, चिकित्सा सेवाएं और अन्य सुविधाएं सुचारू रूप से संचालित रहीं। वहीं, मुज़फ्फरनगर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को कुशलतापूर्वक संभाल रखा है। अंत में बापू के भजनों ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया, जहां श्रोता भावविभोर होकर कथा के संदेशों को आत्मसात करते नजर आए।

आरक्षी निर्देश शाह के पिता के निधन पर पुलिस विभाग में शोक की लहर
हरिद्वार (रिपोर्टर)। रोशनाबाद पुलिस कार्यालय में तैनात आरक्षी निर्देश शाह के पिता इंद्रमोहन शाह का सोमवार को निधन हो गया। उनके निधन से पुलिस और वन विभाग में शोक की लहर है। वन विभाग में रेंजर पद से सेवानिवृत्त हुए 75 वर्षीय स्व.इंद्रमोहन शाह को स्वास्थ्य संबंध परेशानी के चलते जॉलीग्रांट हॉस्पिटल में भर्ती कराया






