शुकतीर्थ में रामकथा के दूसरे दिन साधु चरित्र की महिमा का भावपूर्ण निरूपण

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शुकतीर्थ (रिपोर्टर)। पवित्र तीर्थनगरी शुकतीर्थ में चल रही नवदिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा व्यास मोरारी बापू ने साधु-संतों के चरित्र, उनके मर्म और आध्यात्मिक ऊँचाई का अत्यंत मार्मिक एवं गूढ़ वर्णन किया। पूरे प्रवचन में साधु जीवन की निष्कपटता, स्वतंत्रता और ज्ञानमय स्वरूप केंद्र में रहा, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कथा के आरंभ में बापू ने परम पूज्य शुकदेव जी महाराज को नमन करते हुए सभी संतों, विद्वानों, व्यासपीठ के आचार्यों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि शुकतीर्थ वह पावन भूमि है जहां भागीरथी और भागवत दोनों का दिव्य संगम है—एक ओर गंगा का पवित्र जल प्रवाहित है तो दूसरी ओर शुकदेव जी की अमृतमयी वाणी। ऐसी तपोभूमि न केवल पूजनीय है बल्कि आत्मिक जागरण का केंद्र भी है।उपनिषदों में वर्णित परमहंस स्वरूप का उल्लेख करते हुए बापू ने बताया कि शुकदेव जी का व्यक्तित्व सीमित नहीं, बल्कि आकाश की भांति असीम और विराट है। वे संशयरहित, निर्विकार और पूर्ण ज्ञान के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा बुद्ध पुरुष वही है जिसके भीतर कोई द्वंद्व या संशय शेष न रह जाए—वह सत्य में स्थित रहता है, चाहे संसार उसे माने या न माने।कथा में श्रीकृष्ण और गोपियों के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बापू ने प्रेम और साधना की उच्चतम अवस्था को समझाया। उन्होंने कहा कि गोपियां केवल श्रीकृष्ण की प्रतिमा का ध्यान नहीं करती थीं, बल्कि उनकी ‘गति’—उनकी चेतना और भाव को अपने अंतर्मन में धारण करती थीं। प्रतिमा के सामने ध्यान करना सरल है, किंतु निराकार गति का ध्यान करना अत्यंत कठिन साधना है, जो केवल निष्कपट प्रेम और पूर्ण समर्पण से ही संभव है।
भाषा के विविध रूपों पर प्रकाश डालते हुए बापू ने कहा कि एक भाषा वह है जो कम शब्दों में गूढ़ बात कहती है, दूसरी ‘उपाधि भाषा’ है जो पीड़ा, चिंता और परिस्थितियों से उत्पन्न होती है, और तीसरी ‘व्याधि भाषा’ है जो असंतुलित मनःस्थिति की अभिव्यक्ति होती है। संत वाणी इन सबसे परे होती है। उन्होंने कबीरदास के पद का उल्लेख करते हुए कहा कि संतों की वाणी को समझने के लिए सामान्य दृष्टि नहीं, बल्कि ‘साधु दृष्टि’ की आवश्यकता होती है।
साधु चरित्र की व्याख्या करते हुए बापू ने कहा कि साधु किसी जाति, कुल, धर्म या सामाजिक बंधनों से परे होता है। भगवान भी जात-पात या कुल नहीं देखते, वे केवल नवधा भक्ति को स्वीकार करते हैं। साधु की ‘संगत’ होती है, ‘पंगत’ नहीं; साधु का धर्म नहीं, बल्कि ‘मर्म’ होता है। सनातन उसका मूल है, परंतु उसे किसी सीमित परिभाषा में नहीं बांधा जा सकता।उन्होंने कहा कि सच्चा साधु त्रिगुणों—सत्व, रज और तम—से ऊपर उठ चुका होता है। उस पर किसी विधि या निषेध का बंधन लागू नहीं होता। साधु चतुराई से दूर, सहज, सरल और निष्कपट होता है। गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए बापू ने कहा— “मन, कर्म, वचन छोड़ि चतुराई, जो भजत कृपा करिहैं रघुराई।”
बापू ने शुकदेव जी महाराज को अक्षय, अमर और निर्वाण स्वरूप बताते हुए कहा कि वे केवल चिरंजीवी नहीं, बल्कि शाश्वत चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप में कहा कि जैसे तोते में अनेक रंग होते हैं, वैसे ही बुद्ध पुरुष के भीतर समस्त भाव और रंग समाहित होते हैं।कथा के दौरान बापू ने संत कल्याणदेव जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अनेक शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की, लेकिन स्वयं पूर्णतः विरक्त जीवन जिया। यही साधु जीवन की पराकाष्ठा है—लोकमंगल करते हुए भी भीतर से निर्लिप्त रहना। उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली में समाज की कुछ प्रवृत्तियों पर भी प्रकाश डाला और सहज भाषा में गूढ़ संदेश दिए। साथ ही श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुशासन अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि रात्रि में तिलक और माला उतारकर नहीं सोना चाहिए, यह साधना की निरंतरता का प्रतीक है।दूसरे दिन की कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर साधु चरित्र की महिमा का रसपान किया। कथा के मुख्य यजमान एवं आयोजक चेतन भाई तथा श्रीराम कथा समिति के जिनेन्द्र गर्ग,प्रदीप जिंदल , अमित गोयल व सत्यप्रकाश रेशू ने भावविभोर होकर श्रीराम कथामृत का पान किया। पूरे वातावरण में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही।

मुजफ्फरनगर-कांवड़ कंट्रोल रूम बना मां-बेटी के लिए मददगार, छह घंटे बाद फिर से हुआ मिलन

मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ में बिछड़ने की घटनाओं से निपटने के लिए जिला पुलिस प्रशासन द्वारा बनाई व्यवस्था एक बार फिर कारगर साबित हुई। रामपुर तिराहा के अस्थायी थाने और शिवचौक कांवड़ कंट्रोल रूम की त्वरित कार्रवाई से छपार क्षेत्र में अपनी मां से बिछड़ी 16 वर्षीय कांवड़िया युवती को

सांसद हरेंद्र मलिक के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने शिव चौक पहुंचकर की कांवड़ियों का पुष्प वर्षा

मुज़फ्फरनगर (रिपोर्टर)। श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा के दौरान रविवार को समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने शिव चौक पहुंचकर शिवभक्त कांवड़ियों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान कांवड़ियों के प्रति सम्मान और आस्था व्यक्त करते हुए उनकी धार्मिक यात्रा की सखद, सुरक्षित एवं मंगलमय पूर्णता

मैकलारेन स्पोर्ट्स कार की डिजाइन पर बनी भव्य कांवड़

मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। कांवड़ मेले में इस वर्ष आस्था के साथ आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। इस बार 5.5 करोड़ रुपये की सुपरकार मैक्लॉरेन जैसी दिखने वाली अनोखी कांवड़ आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। शनिवार दोपहर जब यह कांवड़ दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 पर सिसौना कट के पास पहुंची, तो इसे

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मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। आस्था, भक्ति और एक पिता के निश्चल प्रेम की अनूठी मिसाल शहर में देखने को मिल रही है। प्रसिद्ध फेसबुक क्रिएटर अंकित तोमर अपने 11 माह के बीमार पुत्र के पूरी तरह स्वस्थ होने पर भगवान भोलेनाथ का आभार व्यक्त करने के लिए हरिद्वार से दंडवत कांवड़ यात्रा निकाल रहे हैं। शनिवार को

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मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर)। जनपद में कांवड़ यात्रा-2026 को सकुशल, सुरक्षित एवं निर्विघ्न सम्पन्न कराने के उद्देश्य से 02 अगस्त की देर रात्रि मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक भानु भास्कर द्वारा जनपद मुजफ्फरनगर का भ्रमण कर कांवड़ मार्ग एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस

सीएमओ ने कांवड़ चिकित्सा शिविरों में स्वयं संभाली कमान

मुजफ्फरनगर (रिपोर्टर) मुजफ्फरनगर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने श्रावण कांवड़ यात्रा के दौरान स्थापित चिकित्सा शिविरों का निरीक्षण करते हुए सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा शिविरों में पहुंचकर स्वयं कांवड़ियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया, घायलों की प्राथमिक चिकित्सा की, पट्टियां बांधी तथा आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। कांवड़ियों

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