मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरथावल की पूर्व संविदा स्टाफ नर्स रूबीना बेगम ने पूर्व सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार और लेखाकार देवेंद्र शर्मा के खिलाफ मेरठ न्यायालय में वाद दायर किया है। मामले की सुनवाई 23 मई को होगी।
उक्त मामले में वर्ष 2022 में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वायरल वीडियो में रूबीना को एक महिला से पैसे लेते हुए दिखाया गया था। रूबीना का कहना है कि यह पैसा टीवी खरीदने का था। इस वीडियो के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया और सात माह बाद उनकी संविदा समाप्त कर दी गई।
रूबीना का आरोप है कि तत्कालीन सीएमओ और लेखाकार ने वीडियो को रिश्वत का मामला बताकर उन्हें निलंबित किया। उनका कहना है कि बहाली के लिए उनसे 8 लाख रुपये मांगे गए और पैसे न देने पर संविदा समाप्त कर दी गई। रूबीना ने यह भी आरोप लगाया कि नियमों के विपरीत पांच सदस्यीय कमेटी के बजाय सिर्फ दो एसीएमओ से जांच कराई गई। वीडियो में दिख रही महिला को जांच टीम द्वारा मरीज बताया गया, जबकि अस्पताल के रजिस्टर में उसका कोई रिकॉर्ड नहीं था।
कोर्ट में दाखिल दलील में रुबीना ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने जांच में क्लीन चिट देने के लिए उससे मोटो रकम की मांग की गई। रिश्तेदारों से रकम लेकर भी दी गई, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं कर पाई। इसी वजह से नवंबर 2022 में उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मेरठ की विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में दावर परिवाद में रूबीना बेगम ने बताया कि आईजीआरएस प्लेटफार्म पर हुई शिकायत की जांच में उनकी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया को सही नहीं माना गया। कई बार लिखित शिकायत कर ईमानदारी से लोक कर्तव्य विधि अनुसार कार्रवाई का अनुरोध किया गया। इस मामले में विजिलेंस के एसपी को भी शिकायत की गई। इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों में पूर्व सीएमओ डा. महावीर सिंह फौजदार और लेखाकार देवेन्द्र शर्मा को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता रूबीना बेगम का कहना है कि कोर्ट ने परिवाद का संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए 23 मई की तारीख मुकर्रर की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और अपनी बहाली को लेकर वह कोर्ट में गई है और उसे उम्मीद है कि उसे न्याय मिलेगा।
उधर, पूर्व सीएमओ डॉ. फौजदार का कहना है कि आरोपी संविदा कर्मी नर्स द्वारा रिश्वत लेने का वीडियो उप मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा था और उन्हीं के आदेश पर कार्रवाई की गई थी। उन्होंने रूबीना के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने बताया कि रूबीना ने जिला स्वास्थ्य समिति में बहाली का प्रस्ताव रखा था, जो निरस्त हो गया था।






