मुजफ्फरनगर। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था एवं आपसी सद्भाव व हर्षोल्लास के बीच जनपद में करीब 1220 से अधिक स्थानों पर गुरूवार सुबह से देर सायं तक होलिका लगाकर पूजन-अर्चन के बाद रात्रि में तय मुहूर्त पर होलिका दहन प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस बीच नगर मुख्यालय से गांव-देहात और कस्बों के साथ मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में आला अधिकारियों के निर्देशों के बीच पुलिस-प्रशासन होलिका दहन स्थलों पर सुरक्षा कारणों से पूरी तरह अलर्ट मोड़ पर दिखाई दिया। उधर, देर रात्रि तक जिला मुख्यालय से गांव-देहात व कस्बों में होली पूजन एवं दहन प्रक्रिया के बीच में हर ओर युवाओं की टोली डीजे की धुनों पर मस्ती में थिरकते दिखाई दी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने परंपराओं का निर्वहन करते हुए गेहूं की बाली और गन्ने को होलिका में निकालने के साथ घर-परिवार के साथ धन-धान्य की मंगल कामना की।
फाल्गुन माह में बसंतोत्सव की धूम के बीच गुरूवार को देशभर के साथ जनपद में होली का पर्व पूर्ण उल्लास एवं आस्था के बीच मनाया गया। इससे पूर्व बीते कई दिनों से नगर मुख्यालय के साथ गांव-देहात और कस्बों में होली पर्व मनाने की शुरू तैयारी गुरूवार को अपने चरमोत्कर्ष पर दिखी। गुरूवार सुबह होलिका पूजन के लिए तय स्थलों पर जहां एक ओर बुजुर्ग महिलाओं के साथ में महिलाओं ने अपने बच्चों एवं परिवार के साथ में होलिका पूजन किया। इस बीच महिलाओं के साथ आए छोटे बच्चों के गले में टॉफी-चाकलेट, गोला एवं मखाने आदि से बनाई गई मालाएं बच्चों को एक-दूसरे से अलग दिखाने में जुटी थी, जो आकर्षण के केंद्र में रहे। इस दौरान महिलाओं ने घर-परिवार और बच्चों की सुख-समृद्धि की कामना के लिए होलिका पूजन करने के साथ ही होलिका की परिक्रमा की। बसंत पंचमी के दिन पूजन करने के बाद बसंत रखे जाने की परंपराओं के निर्वहन के बीच करीब 40 दिनों के बाद होलिका पूजन करने के बाद देर सायं पूजन करने के बाद होलिका दहन किए जाने की परंपरा है। पौराणिक कथाओं में हरि भक्त प्रह्लाद होलिका के अग्रि स्नान में बच गया था और होलिका रूपी अहंकार जलकर राख होे गई थी। परंपराओं के बीच इसके लिए छोटे बच्चों को पहनाने वाली विशेष मालाएं घरों में बनाने के साथ गली-मौहल्ले से गांव-देहात में बच्चों के गले की शोभा बढ़ाती हुई दिखाई दी। इस कड़ी में गुरूवार सुबह से तमाम होलिका स्थलों पर डीजे की धुनों पर महिलाओं ने पूजन करते हुए बच्चों के सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। इस बीच महिलाओं व बच्चों ने होलिका पूजा करने के साथ गोबर के कंडों की बनाई मालाओं को होलिका में अर्पित किए गए। इसके साथ बढ़ी संख्या में महिलाओं ने होलिका पूजन पर बेर, आटा, पताशे व फल आदि के साथ वस्त्र स्वरूप साड़ी आदि परिवार व बच्चों की दीघार्यु की कामना के साथ चढ़ाया। होलिका पूजन के बीच महिलाओं ने धागे के माध्यम से पांच-सात फेरे के रूप में चक्कर काटकर महिलाओं ने मन्नतें मांगी। देर सायं जिले की ग्राम पंचायतों के साथ कस्बों व नगर क्षेत्र के 1220 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन स्थलों पर देर रात्रि तक युवाओं व बच्चों की टोली डीजे की धुनों पर नृत्य करती दिखी। उधर, सुरक्षा के चलते होलिका दहन स्थलों पर पुलिस बल ऐतियात के तौर पर मौजूद रहा। इस बीच गांव-देहात व कस्बों और नगर पंचायतों में भी होलिका पूजन और दहन के तमाम कार्यक्रम आयोजित किए गए। उधर, नगरीय क्षेत्र के साथ गांव-देहात और कस्बों में बड़ी संख्या में सनातन संस्कृति से जुड़े परिवारों ने अपने पितृदेव की भी पूजा-अर्चना करने के साथ घर-परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।







