श्रद्धा से मनाया आचार्य विद्या सागरजी का प्रथम समाधि स्मृति दिवस

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मुजफ्फरनगर। जैन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के महाप्रयाण का एक वर्ष पूर्ण होने पर श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में स्मृति दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान विधि विधान पूर्वक पूजन करते हुए आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख भक्तों ने अष्टद्रव्य जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप व फल के अर्घ्य चढ़ाए।
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना मंदिर में गुरूवार को संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का प्रथम समाधि दिवस भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस दौरान आचार्य छत्तीसी विधान में आयोजन में भक्तों ने भाग लेते हुए आचार्य श्री के चित्र के सम्मुख पूजा अर्चना करते हुए महाआरती की। आचार्य विद्या सागर जी के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी एक दिव्य पुरुष थे, जिनके जीवन का हर हिस्सा मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उनकी तप साधना एक मिसाल है, जो प्रकृति में सुगंध की तरह महक रही है। मूकमाटी महाकाव्य जैसे 100 से अधिक ग्रंथों के रचयिता, 75 गौशालाओं, अनेक अस्पतालों व गुरुकुल विद्यालयों के प्रेरक आचार्य श्री एक वर्ग विशेष के नहीं, अपितु समूचे राष्ट्र के ऐसे पूजनीय संत थे, जिन्होंने अपने ज्ञान, संयम, तप, त्याग, आचरण व परोपकार से जन-जन को लाभान्वित किया। उन्होंने वैराग्य धारण करने के बाद 50 साल से अधिक की अपनी अनवरत साधना के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 55 हजार किमी की पदयात्राएं करते हुए संस्कृति की धर्म पताका फहराते हुए देश में अहिंसा एवं सद्भावना का संदेश फैलाकर समाज व राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की। इस दौरान श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेश जैन, महामंत्री संजय जैन, कोषाध्यक्ष मनोज जैन, विप्लव जैन, आशीष जैन, रोहित जैन, अमित जैन समेत बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।

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