बढ़ती बीमारियों की रोकथाम में कारगर है प्राकृतिक खेती

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मुजफ्फरनगर। प्राकृतिक खेती वास्तव में एक रसायनमुक्त उर्फ पारंपरिक खेती पद्धति है, जिसमें कृषि से जुड़ी परिस्थितियों पर आधारित विविध कृषि प्रणाली माना जाता है, जो फसलों, पेड़ों और पशुधन को कार्यात्मक जैव विविधता के साथ एकीकृत करती है। उक्त उद्गार विकास खंड मोरना के ग्राम बेहड़ा सादात निवासी कृषक राकेश कुमार ने मीडिया से वार्ता के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि लोगों में बढ़ती शुगर, बीपी, थायराइड जैसी तमाम बीमारी जहरीले अन्न, फल और सब्जी की देन है। उन्होंने बाजारों में बिक रहे अमरूद को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए इस पर प्रतिबंध लगाए जाने की पैरवी की। उन्होंने बताया कि अमरूद व सब्जियों में जहरीली दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है, जो बंद होना चाहिए।
डीएम उमेश मिश्रा की पहल पर जनपद के किसानों को उनकी प्राकृतिक व आर्गेनिक खेती की ओर बढ़ते कदमों को आने वाले दिनों में कारगर मानते हुए सम्मानित किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को डीएम उमेश मिश्रा ने जिलाधिकारी कक्ष में जनपद के विकास खण्ड मोरना के ग्राम बेहड़ा सादात के निवासी कृषक राकेश कुमार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। राकेश कुमार द्वारा बीते 8 वर्षों से जिले में प्राकृतिक खेती और वर्मी कम्पोस्ट का कार्य किया जा रहा है। राकेश कुमार प्रतिवर्ष 450 कुंतल गन्ना, 45 कुंतल सरसों, 15 कुंतल मसूर, 20 कुंतल गेहूँ एवं 150 कुंतल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे इनको 5 लाख रुपए का प्रतिवर्ष लाभ प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त राकेश कुमार गुड़ और शक्कर का उत्पादन भी कर रहे हैं जिसमें इनको प्रतिवर्ष 1 लाख रुपए का लाभ प्राप्त हो रहा है। राकेश कुमार द्वारा प्राकृतिक रूप से बागवानी एवं शाकभाजी की खेती भी की जा रही है। राकेश कुमार को उत्तर प्रदेश दिवस 2024 को राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उप निदेशक कृषि संतोष कुमार, जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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