मुजफ्फरनगर। नगरीय क्षेत्र में पालिका की तय शर्तों के अनुरूप डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कार्य न होने पर पालिका ईओ ने कम्पनी के प्रति कड़ी नाराजगी जताते हुए सख्त कदम उठाए हंै। उन्होंने कम्पनी को कार्य शैली में सुधार करने के लिए चेतावनी नोटिस भेजा है। वहीं दिल्ली की कम्पनी के असंतोषजनकपूर्ण कार्य को लेकर सभासद और नगरवासियों में काफी रोष व्याप्त है।
नगरपालिका परिषद में कूड़े की समस्या का स्थाई निदान करने को लेकर पालिका की चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप की महत्वाकांक्षी योजना परवान चढ़ती दिखाई नहीं दे रही है। बीते 17 फरवरी में तय शर्तों के बीच डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन एवं कूडा डलाव घर समाप्त किए जाने की योजना की खातिर पालिका प्रशासन ने 92 लाख रुपए प्रतिमाह खर्च कर, दिल्ली की कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी शुरूआती दौर में तेजी से आगे बढ़ी तो उसकी ओर हर किसी ने हाथ बढ़ाने का ही काम किया, लेकिन समय के साथ उक्त कंपनी प्रगति करने के बजाए बैक होती चली गई। बीते दिनों छह दिनों की हड़ताल के बाद कंपनी कार्य पटरी पर आ नहीं पाया। इस बीच कई इलाकों में जहां फिर से स्थानीय रेहड़ा सफाई कर्मी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे, स्थानीय लोगों का सहयोग न मिल पाने से कंपनी अपने काम को पूरा करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है।
ईओ डा. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि 20 से 22 दिसम्बर तक क्षेत्र में डोर टू कूड़ा कलेक्शन ही नहीं किया गया। 22 दिसम्बर को नगर स्वास्थ्य अधिकारी की मध्यक्षता के बाद मात्र 6 वार्डों में ही कूड़ा उठाने के लिए गाड़ियां पहुंची हैं। वहां भी आधा-अधूरा ही कंपनी के कर्मचारियों से कूड़ा कलेक्शन कार्य किया गया। इस कार्यशैली से लोग परेशान हैं, वहीं सभासदों में भी रोष व्याप्त है। कंपनी द्वारा कूडा कलेक्शन, प्रबंधन व यूजर चार्ज के कार्य में असंतोषजनक अव्यवस्था की स्थिति बनी है। उन्होंने बताया कि अनुबंध की तय शर्त संख्या-12 में स्पष्ट रूप से अंकित है कि कम्पनी अपने अधीनस्थ श्रमिकों का भुगतान हर माह की 7 तारीख तक उनके बैंक खातों में अनिवार्य रूप से किया जाएगा। चाहे पालिका से भुगतान हुआ हो या नहीं। समस्त जिम्मेदारी प्रथम पक्ष (फर्म) की होगी, लेकिन फर्म द्वारा लगातार अपने वाहन चालकों व श्रमिकों के वेतन भुगतान में विलम्ब किया जा रहा है, जिस कारण हड़ताल की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। उन्होंने बताया कि अनुबन्ध की निर्धारित शर्तों का फर्म द्वारा पालन न किये जाने के दृष्टिगत यदि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो उसका समस्त उत्तरदायित्व फर्म का होगा।






