पालिका के पथ प्रकाश विभाग में नहीं विद्युत पोल रिकॉर्ड

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मुजफ्फरनगर। पालिका का पथ प्रकाश विभाग सभासद की शिकायत के बाद सुर्खियों में है। अब विभाग की आंकड़ों की बाजीगरी में नया खुलासा हुआ है। पूर्व में खरीदी 4 हजार एलईडी लाइट वितरण व अधिष्ठापन को लेकर ईओ की ओर से बैठाई जांच में नए सवाल सामने आए हैं, इसमें पथ प्रकाश विभाग के पास में कोई आंकड़ा ही नहीं है, जिसमें कोई यह बता पायें कि शहरी क्षेत्र में पथ प्रकाश के लिए कितने खंभे लगे हुए हैं। इसके बावजूद भी विभाग लाइटों के वितरण में जुटा हुआ है। ईओ ने प्रभारी अधिकारी पथ प्रकाश से मामले में जवाब मांगा है।
पालिका क्षेत्र में पथ प्रकाश के लिए शहर में विद्युत विभाग के पोल लगे हैं, इनमें मुख्य मार्गों पर कुछ स्थानों पर पालिका द्वारा पोल्स लगाए गए हैं। रात्रि में मुख्य मार्ग व वार्ड की गलियों में रोशनी को पालिका पथ प्रकाश विभाग कार्यरत है। सीमा विस्तार के बाद पालिका में 11 गांव का क्षेत्र के साथ अब वार्डों की संख्या 55 हो गई है, जिसमें पथ प्रकाश विभाग एलईडी लाइटों की खरीद करते हुए इनका वितरण कर रहा है, लेकिन आज तक पालिका में क्षेत्र में विद्युत पोल्स का कोई सटीक आंकड़ा ही नहीं है। पूर्व के बोर्ड में 15,927 विद्युत पोल्स होने के आंकड़े के साथ विभाग काम कर रहा है। मौजूदा बोर्ड में सीमा विस्तार बाद पथ प्रकाश विभाग ने अपने आइडिया से यह आंकड़ा 22 हजार विद्युत पोल कर लिया, जिसमें अधिकारिक संख्या बल कुछ नहीं जुटाया गया है, जबकि पूर्व में एक बार विद्युत पोल सर्वे कराया गया था। इसके बाद भी पालिका के पथ प्रकाश विभाग में कोई आंकड़ा सुरक्षित नहीं किया गया। भाजपा सभासद देवेश कौशिक की शिकायत पर शुरू जांच में यह बात सामने आने पर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने नाराजगी जताते हुए प्रभारी अवर अभियंता जलकल धर्मवीर सिंह को पत्र के माध्यम से शहरी क्षेत्र में विद्युत पोल संख्या की जानकारी मांगी है, लेकिन अभी तक उन्हें जवाब नहीं दिया है। पथ प्रकाश प्रभारी जेई धर्मवीर का कहना है कि अब तक में उपलब्ध आंकड़े के अनुसार करीब 22 हजार विद्युत पोल हैं, जिन्हें लेकर विभाग काम करता है। उन्होंने कहा कि ईओ द्वारा मांगी जानकारी पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जल्द उनको आंकड़ा दिया जायेगा।

इन्होंने कहा-
पालिका ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि पथ प्रकाश विभाग के पास अभी पालिका शहरी क्षेत्र के विद्युत पोल का संख्यात्मक कोई आंकड़ा नहीं है। आइडिया पर काम किया जा रहा है। ऐसे में यह भी नहीं पता चल पायेगा कि कहां किस पोल पर कब और कितनी बार एलईडी लाइट लगी है। उन्होंने विभाग से रिपोर्ट मांगी है ताकि क्षेत्र के विद्युत पोल का आंकड़ा सामने आ सके। उन्होंने कहा कि ऐसा न होने से विभाग के कर्मियों को क्षेत्र के विद्युत पोल का सर्वे कराते हुए नम्बरिंग कराने के साथ सटीक आंकड़ा बना कर काम किया जायेगा। इसमें ऐसे भी स्थान है, जहां पोल नहीं होने पर भी किसी के मकान की दीवार या अन्य स्थान पर भी विद्युत लाइट लगी है। इन स्थानों को चिन्हित किया जायेगा। शहरी क्षेत्र के तमाम प्रकाश बिन्दुओं को एक नम्बर देकर सूचीबद्ध करने का काम जल्द शुरू कराया जायेगा ताकि भविष्य में भी उसी नम्बर से उनकी पहचान होकर रिकार्ड सुरक्षित किया जा सके।

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